आईये जानते है किन विभागों के 675 गैर जरूरी कानूनो को खत्म करने जा रही है सरकार



उत्तर प्रदेश सरकार अब गैरजरूरी कानूनों को खत्म करने की ओर तेजी से बढ़ रही है। सरकार ने संबंधित विभागों को यह निर्देश जारी किया है कि सारे लंबित प्रकरणों को समयबद्ध तरीके से निस्तारण करने के लिए नियमित समीक्षा करें और इस बात की जानकारी दें कि कौन से ऐसे कानून हैं, जिससे कामकाज प्रभावित होता है और मौजूदा समय में कौन से कानून गैरजरूरी साबित हो रहे हैं। इससे प्रदेश सरकार के कई विभागों में कामकाज आसान हो जाएगा। आपको बता दें कि योगी सरकार चाहती है कि प्रदेश में लालफीताशाही और नियमों का हवाला देकर फाइलों को रोकने और काम में अड़ंगा लगाने की गतिविधियां बंद हो, ताकि प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियां तेजी से चलें और नागरिकों को बेहतर से बेहतर सेवाएं और सुविधाएं मिलने लगें। 
 सीएम योगी जी का कहना है कि इससे प्रदेश में बड़े पैमाने पर रोजगार का सृजन होगा और आम आदमी को इसका लाभ मिलेगा। सरकार ने कहा है कि कई गैर जरूरी कानूनों से संबंधित सभी विभाग लंबित प्रकरणों का समाधान तय समय सीमा में कर दें और जिन कानूनों को समाप्त किया जाना है, उसके संबंध में तेजी से कार्यवाही करें। ताकि उन्हें जल्द से जल्द खत्म किया जाए। इस कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। 675 कानूनों को खत्म करने की योजना आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश के करीब दो दर्जन विभागों में 675 गैरजरूरी कानूनों को खत्म करने की योजना पर काम शुरू कर दिया गया है। अब उन्हें जल्द से जल्द खत्म किया जाना है। इसके लिए संबंधित विभागों को लंबित प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण करके काम की गति तेज करनी होगी। 
मुख्यमंत्री कार्यालय समाधान के लिए चल रही कार्यवाही की सीधे मॉनीटरिंग करेगा। मुख्य सचिव को नियमित समीक्षा करने का निर्देश दिया गया है, ताकि इसमें किसी तरह की अनावश्यक देरी न हो। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष सोमवार को 'रिव्यु ऑफ मिनिमाइजिंग रेगुलेटरी कॉम्प्लायन्सेज बर्डेन' के बारे में एक प्रजेंटेशन देकर समझाने का काम किया गया था। इसके बाद सीएम योगी ने कहा कि सरकार 'ईज ऑफ डूईंग बिजनेस' व 'ईज ऑफ लिविंग' को पूरी तरह से लागू करना चाहती है, ताकि प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियां तेजी से चलें। किसी तरह की अड़ंगेबाजी इसमें नहीं होनी चाहिए। 
इस मौके पर मौजूद अपर मुख्य सचिव अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास अरविंद कुमार ने बताया कि इसकी पहल केंद्र सरकार ने 2020 के सितंबर महीने में की थी, ताकि निर्धारित मापदंडों पर गैरजरूरी कानूनों कम किया जा सके या खत्म किया जा सके। इसके दो चरण तैयार किए गए हैं। पहला 31 मार्च में लागू हुआ, जबकि दूसरा चरण 15 अगस्त से लागू होगा। अपर मुख्य सचिव अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास अरविंद कुमार ने बताया कि दोनों चरणों के तहत 675 कॉम्प्लायन्सेज बर्डेन (गैरजरूरी कानून) को चिन्हित किया गया है। अब इन पर काम चल रहा है और जल्द ही इनको खत्म करने की ओर कदम बढ़ाया जाएगा। 
जिन 675 कॉम्प्लायन्सेज बर्डेन (गैरजरूरी कानून) को चिन्हित किया गया है, उनमें श्रम, आबकारी, ऊर्जा, वन, रेरा, पर्यावरण, खाद्य एवं रसद, प्राथमिक शिक्षा, पंचायती राज, उच्च शिक्षा, हैंडलूम व वस्त्रोद्योग, गृह, चिकित्सा शिक्षा, राजस्व, आवास, मत्स्य, सिंचाई व जल संसाधन, तकनीकी शिक्षा, परिवहन एवं नगरीय विकास जैसे विभाग शामिल हैं। इस मौके पर मुख्य सचिव आरके तिवारी, कृषि उत्पादन आयुक्त आलोक सिन्हा, अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी, अपर मुख्य सचिव एमएसएमई एवं सूचना नवनीत सहगल, अपर मुख्य सचिव ग्राम्य विकास एवं पंचायती राज मनोज कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण मनोज सिंह के साथ साथ अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा मोनिका एस गर्ग, अपर मुख्य सचिव वाणिज्य कर एवं अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त संजीव मित्तल, अपर मुख्य सचिव नगर विकास डा. रजनीश दुबे व अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे और सभी ने अपने विभाग से संबंधित मामलों पर चर्चा की।

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