विधायक के दबाव में पत्रकार पर फर्जी मुकदमा, जिम्मेदार इस फर्जी कहानी में शामिल



जौनपुर। जन प्रतिनिधि के दबाव में जनपद के थानो की पुलिस फर्जी मुकदमें पंजीकृत करके पत्रकारो के उत्पीड़न का खेल शुरू कर दिया है। इसकी जितनी भी निन्दा किया जाए कम होगा। पुलिस की इस तरह की कार्रवाईयों से मीडिया को दहशत में लाने का कुत्सित खेल किया जा रहा है। जी हां इस तरह का खेल जौनपुर स्थित थाना नेवढ़ियां की पुलिस ने मड़ियाहूँ क्षेत्र के  पत्रकार कौशल पान्डेय के खिलाफ फर्जी मुकदमा मड़ियाहूँ विधायक की तहरीर पर दर्ज किया है।
पुलिस की एफआईआर में स्पष्ट रूप से मड़ियाहूं विधायक आर के पटेल के तहरीर का जिक्र किया गया है। विधायक ने जिस मुद्दे को लेकर मनगढ़ंत कहांनी रची है उसकी सच्चाई है कि पत्रकार कौशल पान्डेय और नेवढ़िया थाना क्षेत्र के सा.मौ. मेउडिया नेवढ़िया बाजार निवासी अजय कुमार दुबे, आदित्य दुबे, उत्सव और प्रवीण कुमार से कुछ पैसे के लेन देन का मामला था। जिसे कौशल पान्डेय ने 15 नवम्बर 23 तक वापस कर दिया इसके बाद दोनो पक्षो ने एक नोटरी के तहत लिखा पढ़ी किया कि दोनो के बीच कोई लेन देन शेष नहीं है। इसके बाद अजय दुबे ने पत्रकार कौशल पान्डेय को मारने पीटने की धमकी दिया। कौशल पान्डेय ने थाने में शिकायत किया लेकिन उनकी आवाज नहीं सुनी गई। इसके बाद पत्रकार ने दीवानी न्यायालय के सिविल जज की कोर्ट में धारा 156 (3) के तहत अजय आदि के खिलाफ तीन मुकदमा मुकदमा वाद संख्या 1367/23, 20 दिसम्बर 23 को किया, दूसरा 21 दिसम्बर 23 को मुकदमा वाद संख्या 1673/23 और तीसरा मुकदमा परिवाद संख्या 252/23 दिनांक 22 दिसम्बर 23 को दाखिल किया।इस मुकदमे में अजय दुबे को कोर्ट ने नोटिस देकर तलब किया तो अजय दुबे जो खुद को अपना दल का नेता बताते है और विधायक डाॅ आर के पटेल के खास सिपह सालार है विधायक अजय से प्रार्थना पत्र लेकर खुद मुकदमा वादी बन गये और पुलिस पर जबरिया बनाया अपने विधायकी और सत्ता के दबाव में लेकर पत्रकार के खिलाफ थाने में मुकदमा दर्ज करवा दिया और अब उस पैसे के लिए जबरदस्त दबाव बना रहे है जिसका लेन-देन पहले हो चुका है। अजय पत्रकार को मारने की धमकी भी दिए और जब पत्रकार न्यायालय की शरण जा कर न्याय पाने की अपेक्षा किया तो विधायक अपनी ताकत दिखाने कूद पड़े और पत्रकार को फर्जी मुक़दमे में सरकारी मशीनरी पुलिस के जरिए फंसा दिया है।
ऐसे अब सवाल उठता है कि क्या पुलिस प्रशासन के अधिकारी पत्रकार के साथ हो रहे इस तरह जुल्म के प्रति न्याय कर सकेंगे। या फिर जन प्रतिनिधियों के दबाव में पत्रकारो के शोषण उत्पीड़न के साक्षी बनेगे?

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