जौनपुर में दस वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म, मेडिकल के बाद मुकदमा हुआ दर्ज, दुष्कर्मियों की तलाश जारी


 

जौनपुर। थाना मछली शहर क्षेत्र स्थित कस्बे से धोखे से अपहृत नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म की घटना को पुलिस ने मेडिकल के पश्चात स्वीकारते हुए विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। हलांकि पुलिस अभी तक बहसी दरिन्दों तक नहीं पहुंच सकी है लेकिन अधिकारी का दावा जरूर है कि जल्द दरिन्दे सलाखों के पीछे होंगे। बच्ची के साथ घटित इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है आखिर बेटियां कब सुरक्षित हो सकेंगी। इसका जबाब कौन देगा पुलिस अथवा सरकार ?
यहां बतादे कि विगत 20 जनवरी 21 को सायं काल 6 बजे के आसपास दो युवक थाना मछली शहर के कस्बे में ही थाना लगभग दो सौ मीटर की दूरी पर मोटरसाइकिल सवार दो अंजान युवक  एक महिला से उसके ससुर को पूछा फिर सास से मिलने का स्थल पूँछा तो महिला ने अपने 10 वर्षीय बेटी को युवकों के साथ सास से मिलाने भेज दिया। इसके बाद दोनों युवक बेटी को लेकर कहीं अन्यत्र चले गये और उसके साथ जबरिया गैंगरेप किया और थाना सिकरारा क्षेत्र स्थित एक नहर के किनारे उसे बेहोसी की हालत में फेंक कर फरार हो गये। 
युवको के साथ भेजी गई बच्ची जब देर रात तक वापस घर नहीं लौटी तो परिवार के लोग परेशान हो गये और थाने पर पहुंच कर पुलिस को बेटी के लापता होने की खबर दिया। पुलिस ने मुकदमा लिखने के बजाय खोजबीन की बात किया। दूसरे दिन थाना सिकरारा पुलिस को जरिये ग्रामीण पता चला कि नहर के किनारे एक  दस वर्षीय बच्ची बेहोस पड़ी हुई है। सिकरारा पुलिस ने बच्ची को बरामद किया फिर मछली शहर की पुलिस को सूचना दिया तो बच्ची के परिवार के लोग उसकी पहचान अपने पुत्री के रूप में किया।


तत्पश्चात बच्ची को उपचार हेतु जिला अस्पताल भेजा गया। जहां पर उसका डाक्टरी मुआयना किया गया और होश आने पर 164 का बयान हुआ। मेडिकल रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि होने पर थाना मछली शहर की पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ अपहरण, दुष्कर्म और पाक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया और घटना स्थल के पास लगे सीसीटीवी फुटेज को खंगालने में जुटी हुई है। इस तरह मेडिकल के पहले पुलिस घटना का मुकदमा तक लिखने से परहेज किया यह एक विचारणीय प्रश्न है।


इस बिषय में अपर पुलिस अधीक्षक सिटी ग्रामीण ग्रामीण ने भी अपने बयान में घटना को स्वीकार किया लेकिन पुलिसिया कार्यवाही डाक्टरी मुआयना के बाद ही करने की बात किया है। दावा है जल्द अपराधी गिरफ्तार हो सकते है।
इस घटना ने एक बार फिर कानून व्यवस्था को सवालों के कटघरे में खड़ा किया है आखिर बेटियां कब सुरक्षित हो सकेंगी। सरकार मिशन शक्ति से लेकर तमाम कड़ा कानून बेटियों की सुरक्षा के लिए भले बना रही फिर भी बेटियां सुरक्षित नहीं है। प्रतिदिन कहीं न कहीं बेटियों की अस्मिता तार तार होती नजर आती है। 

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