किसी भी उत्पीड़न से नहीं डरते समाजवादी - शिवपाल सिंह यादव


प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (प्रसपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने कहा है कि प्रदेश की जनता की आवाज पर सपा से गठबंधन हुआ है। समाजवादी किसी उत्पीड़न से डरने वाले नहीं है, फिर वह चाहे फोन टेपिंग हो या फिर ईडी या आयकर के छापे। भाजपा सरकार से लोकतंत्र को जबरदस्त खतरा है और उसकी तानाशाही के चलते हर संस्था निष्पक्ष कार्य नहीं कर पा रही है। हर वर्ग दुखी है। इसलिए भाजपा सरकार को हटाना जरूरी है।
जिला सहकारी बैंक मुख्यालय पर बैंक के 72वें वार्षिक सामान्य निकाय की बैठक में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होने पहुंचे शिवपाल ने सपा और प्रसपा के गठबंधन के लिए जनता की आवाज को श्रेय दिया। पत्रकार वार्ता में उन्होंने बताया कि अब टिकट वितरण, चुनाव चिह्न व उम्मीदवार मैदान में उतारने को लेकर सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव संग बैठकर रणनीति बनाई जाएगी। कहा, फोन टेपिंग, ईडी व आयकर छापा, अन्य किसी प्रकार के उत्पीडऩ से समाजवादी डरते नहीं हैं। भाजपा सरकार से लोकतंत्र को जबरदस्त खतरा है। तानाशाही के चलते हर संस्था निष्पक्ष कार्य नहीं कर पा रही है। हालांकि, इससे स्पष्ट हो गया है कि भाजपा बुरी तरह हार रही है। प्रधानमंत्री का चुनाव मैदान में उतरना सब कुछ बयां कर रहा है।
उन्होंने कहा कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव के साथ और अकेले प्रदेश के हर विधानसभा क्षेत्र तक पहुंचना है। कहा कि प्रधानमंत्री ने बिना मंत्रिमंडल की सलाह व राष्ट्रपति के अनुमोदन के ही नोटबंदी की। इससे तीन गुजरातियों व बैंक के अधिकारियों को भरपूर लाभ मिला। प्रदेश की सहकारिता को कमजोर करने के लिए सहकारी बैंकों में नोट बदलने के कार्य को बंद कराया गया। नोटबंदी से अर्थव्यवस्था चौपट हुई और लोगों का रोजगार छिना। भाजपा सरकार में किसान बर्बाद हो रहे हैं। खाद, पानी व बिजली संकट है। सर्दी में किसान रात में सिंचाई के लिए परेशान होते हैं।
प्रसपा अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव 1977 में सहकारिता मंत्री बने, तब सहकारी आंदोलन गतिमान हुआ। झोलों में रहने वाली समितियों को निजी भवन मिले। जब मुझे इस पद की जिम्मेदारी मिली तो पूर्वांचल की 324 समितियों को फिर से जीवित किया। सरकार सहकारिता आंदोलन को प्रभावित करने में लगी हुई है। निर्वाचित बोर्ड के बजाय प्रशासनिक व्यवस्था लाना चाहती है। सहकारिता में जब-जब प्रशासनिक व्यवस्था हुई, तब-तब आंदोलन कमजोर हुआ। अब सभी को सहकारिता आंदोलन को फिर से मजबूत करना है।

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