जानिए आखिर इस मेडिकल कॉलेज के कर्मचारियों ने क्यों किया ताला बन्दी

किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्विद्यालय के ट्रॉमा सेंटर पर बुधवार को आउटसोर्सिंग कर्मचारियों ने ताला बंद कर दिया। कर्मचारियों ने बताया कि उनके वेतन में से रविवार और गजेटेड छुट्टी का पैसा भी काटा जा रहा है। इससे नाराज कर्मचारियों का गुस्सा बुधवार को फूट पड़ा।कर्मचारियों ने बताया कि उनको जितना वेतन मिलता है उसमें जैसे तैसे काम चलता है। इस बार उनके वेतन में दो से चार हजार रुपए की कटौती कर दी गई है। ऐसे में उनके पास प्रदर्शन के सिवाय कोई चारा नहीं है।
कर्मचारियों ने सबसे पहले ओपीडी में पर्चा बनाना बंद किया। इसके बाद उन्होंने ट्रामा सेन्टर पर जाकर ताला बंद कर दिया। इस बीच काफी पुलिस बल मौके पर पहुंच गया। मरीजों को दूसरे गेट से अंदर भेजा गया लेकिन प्रदर्शन के चलते ट्रॉमा सेंटर में एंबुलेंस की लाइन लग गई।
मौके पर नहीं पहुंचे केजीएमयू के जिम्मेदार
इस पूरे मामले में केजीएमयू प्रशासन की भूमिका उदासीन रही है। ओपीडी ठप होने से लेकर ट्रॉमा सेंटर पर ताला लगने के बावजूद मौके पर कोई भी जिम्मेदार नहीं पहुंचा। इससे कर्मचारियों की नाराजगी और भी बढ़ गई। उन्होंने केजीएमयू प्रशासन चोर है के नारे लगाते हुए प्रदर्शन किया। पुलिसकर्मियों ने ही मौके पर मोर्चा संभाला। इस दौरान कर्मचारियों ने ट्रॉमा सेंटर के पर्चे बनवाने बंद कर दिए। ट्रॉमा सेंटर के दूसरे गेट को भी बंद करने का प्रयास किया लेकिन पुलिसकर्मियों ने ऐसा होने से रोक दिया। सामान्य मरीजों को ट्रायल एरिया में रखा गया। वहीं, गंभीर मरीजों को अंदर भेजा गया।
कर्मचारियों ने प्रदर्शन के दौरान लारी कार्डियोलॉजी की ओपीडी भी ठप कर दी। इसके बाद कर्मचारियों ने सड़क पर भी जाम लगा दिया जिसमें कई एंबुलेंस फंस गईं। करीब दस मिनट बाद पुलिस ने जाम खुलवाया। इसके बाद सभी कर्मचारी आकर ट्रॉमा सेंटर में डट गए।
कर्मचारियों के प्रदर्शन और कार्य बहिष्कार की वजह से मरीजों को काफी समस्या हुई। ऐसे में कई गंभीर मरीजों को उनके तीमारदार वापस लेकर भी चले गए। रायबरेली निवास रमेश ने बताया कि उनके मरीज की हालत बेहद खराब है। उसे एंबू बैग पर रखा गया है। यहां के हंगामे बवाल में इलाज संभव नहीं है। ऐसे में वे उसे लेकर दूसरे अस्पताल जा रहे हैं।

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