साहिल हत्याकांड में न्याय की गुहार, अब तक नहीं मिला इंसाफ, सीएम दरबार पहुंची विधवा मां
पीड़िता ने आरोप लगाया कि हत्या के आरोपियों को प्रभावशाली संपर्कों और सरकारी तंत्र की मदद से अब तक बचाया जा रहा है।
हत्या से पहले भी किया गया था हमला
इस घटना की एफआईआर थाने में दर्ज कराई गई थी, लेकिन तभी से आरोपी FIR वापस लेने का दबाव बनाने लगे। पीड़िता का कहना है कि इस दौरान कई बार फोन कर धमकी और समझौते का दबाव भी बनाया गया।
हत्या और नामजद आरोपी
बावजूद इसके, 14 नवंबर 2024 को साहिल की बेरहमी से हत्या कर दी गई। इस मामले में जिन लोगों पर हत्या और साजिश का आरोप लगाया गया है, उनमें शामिल हैं:
सुधीर सिंह उर्फ़ सद्दू (मुख्य आरोपी)
अनुराग सिंह
सतीश सिंह गोलू
अनुज सिंह
मोहित सिंह उत्तम
पीड़िता के मुताबिक, हत्या के बाद सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। हालांकि, मुख्य आरोपी सुधीर सिंह सद्दू की गिरफ्तारी जानबूझकर टाल दी गई, क्योंकि उसके संबंध सरकारी अधिवक्ता लाल बहादुर पाल से बताए जा रहे हैं।
आरोप है कि विवेचक विनोद मिश्रा और सरकारी वकील की मिलीभगत से सुधीर को संरक्षण मिला।
जमानत याचिकाएं खारिज, फिर भी मिली जमानत
पीड़िता ने दावा किया कि आरोपी सुधीर सिंह सद्दू की जमानत याचिका पहले ही इलाहाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से खारिज हो चुकी है।
लेकिन इसके बावजूद सरकारी वकील और विवेचक ने साक्ष्य छिपाकर निचली अदालत से जमानत दिलवा दी।
मुकदमे से हटाए गए नाम, अब तक नहीं हुई गैंगस्टर की कार्रवाई
साहिल की मां ने यह भी आरोप लगाया कि विवेचक और सरकारी वकील की मिलीभगत से सुधीर सिंह के बेटे सतीश सिंह गोलू और ओम सिंह का नाम भी मुकदमे से हटवा दिया गया।
अब तक आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कोई कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे पीड़िता को न्याय की उम्मीदें लगातार धूमिल होती जा रही हैं।
न्याय की उम्मीद में सीएम दरबार पहुँची पीड़िता
पति को पहले ही खो चुकीं विधवा योगिता सिंह, अब अपने बेटे के हत्यारों को सजा दिलाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से न्याय की गुहार लगा रही हैं। उनका कहना है कि:
सभी आरोपियों की दोबारा गिरफ्तारी हो
गैंगस्टर एक्ट के तहत कड़ी कार्रवाई की जाए
सरकारी अधिवक्ता और विवेचक की भूमिका की जांच हो
मुकदमे से हटाए गए नामों को पुनः शामिल किया जाए
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