अब जियो टैगिंग के जरिये पौधो के रखवाली का दावा, 48 लाख वृक्ष लगाने का वन विभाग ने किया दावा


जौनपुर। आमतौर पर पौधों को रोपित करने के बाद उनकी देखभाल की चिंता शायद ही कोई करता हो, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। विभागों की ओर से कराए जाने वाले पौधरोपण की हकीकत जानने के लिए पौधों की बकायदा जियो टैगिंग कराई जाएगी। विशेष साफ्टवेयर में पौधारोपण स्थलों की जानकारी अपलोड करने के बाद सीधे यह लखनऊ स्थित कमांड सेंटर पहुंच जाएगी। इस व्यवस्था की निगरानी को अलग टीम बनाई गई है। फिलहाल वन विभाग की ओर से 315 स्थलों की रिपोर्ट तैयार कर कमांड सेंटर को सौंप दी गई है। पौधारोपण करा चुके अन्य विभागों की ओर से भी जिओ टैगिंग की जानकारी मांगी गई है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य हर हाल में पौधों की संख्या को बढ़ाना है। इससे सूख चुके पौधों के स्थान पर नए पौधे लगाने में तो मदद मिलेगी ही, विभागों की पौधों की देख-भाल को लेकर जिम्मेदारी भी तय हो सकेगी।
 मानसून शुरूआत के साथ ही जिले में 48 लाख पौधे लगाए गए हैं। इसमे 18 लाख पौधों को वन विभाग ने लगाया, जबकि 30 लाख पौधों को मनरेगा, पंचायत विभाग, बेसिक व डीआरडीए समेत अन्य विभागों की ओर से लगाए गए। बारिश के दिनों में तो पौधे हरे-भरे रहते हैं, लेकिन इसके बाद देख-रेख के अभाव में यह सूखने लगते हैं। वन विभाग समय-समय पर सूखे चुके पौधों के स्थान पर नया पौधा लगाता है, लेकिन अन्य विभाग इसपर इतना ध्यान नहीं रख पाते। ऐसे में यह व्यवस्था पौधों के लिए ही नहीं, बल्कि पर्यावरण के लिए भी संजीवनी बनेगी।
तमाम चुनौतियों के बीच बीते पांच वर्षों में जिले में वृक्ष आच्छादित क्षेत्रों में 17 फीसद इजाफा हुआ है। जो स्वस्थ पर्यावरण के लिए बेहतर है। फिलहाल जिले में छह सौ हेक्टेयर से अधिक वृक्ष आच्छादित क्षेत्र हैं। सार्वजनिक स्थानों व सड़क किनारे लगाए जाने वाले पौधों से हरियाली तो बढ़ ही रही है ग्लोबल वार्मिंग का असर भी कम हुआ है। वन विभाग की ओर से अब अगले वर्ष रोपित किए जाने वाले पौधों को रोपने की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। इसमे तकरीबन 50 लाख पौधों को रोपित करने का लक्ष्य रखा गया है।
बोले अधिकारी : जियो टैगिंग का मुख्य उद्देश्य पौधों की संख्या बढ़ाना है। इससे सूख चुके पौधों को बदलने में मदद मिलेगी। मानीटरिंग होने से विभागों की पौधों की देख-भाल को लेकर जिम्मेदारी भी तय हो सकेगी। -प्रवीण खरे, डीएफओ।

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