आजादी के बाद से अब तक जानें कौन चार प्रत्याशी ही अपने दम पर चुनाव जीते



जौनपुर। लोकतंत्र के इतिहास में आजादी के बाद प्रदेश में 17 बार विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। जनपद जौनपुर के विधान सभा क्षेत्रो से अभी तक चार लोग निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीतने में कामयाब रहे हैं। हर बार चुनाव में तमाम निर्दलीय प्रत्याशी चुनावी जंग  में आते हैं लेकिन उनको जनता वोट काटवा बना देती है। इस बार भी नौ विधानसभा सीटों पर 121 निर्दलीय प्रत्याशी चुनावी समर में हैं।
यहां बता दे कि वर्ष 1952 में पहले विधानसभा चुनाव में जनपद में 11 सीटें थी। तब सभी सीटों पर कांग्रेस के प्रत्याशी जीते थे, लेकिन 1957 में जीत की संख्या दस हो गई। इस चुनाव में भी कांग्रेस मजबूती से लड़ी, लेकिन दो सीट हार गई। जिसमें जौनपुर से राजा यादवेंद्र दत्त दूबे जनसंघ के टिकट से जीते वहीं खुटहन विधानसभा से कुंवर श्रीपाल सिंह ने निर्दलीय चुनाव जीता था। उन्होंने कांग्रेस के विधायक लक्ष्मीशंकर यादव को हराया था। इसके बाद 1967 में दूसरी बार रारी से निर्दल प्रत्याशी राज बहादुर यादव ने चुनाव जीता था। उन्होंने कांग्रेस के दीप नारायण वर्मा को हराया था। इस चुनाव के लगभग 22 साल बाद सन् 89 में जौनपुर सदर विधान सभा से अर्जुन सिंह यादव निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़े और जनता दल के डा छबिनाथ सिंह को हराया था।इसके बाद
2002 में जिले की रारी विधान सभा से बाहुबली  धनंजय सिंह निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनावी समर में उतरे और चुनाव जीते। उनके सामने पूर्व मंत्री श्रीराम यादव समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़ रहे थे, जिन्हें धनंजय सिंह ने पटखनी दिया था। इसके बाद आज तक जनपद के किसी भी विधान सभा से कोई निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव नहीं जीत पाया। हलांकि रारी विधान सभा को मल्हनी बनने के बाद धनंजय सिंह तीन बार निर्दल चुनावी जंग में उतरे जरूर लेकिन पराजय ही मिलती रही। इस बार के आम चुनाव में कोई निर्दलीय प्रत्याशी मुकाबले में नहीं दिख रहा है।

कब जीते निर्दलीय प्रत्याशी जीते

1957 कुंवर श्रीपाल सिंह जीते, लक्ष्मी शंकर यादव (कांग्रेस) हारे
1967 राज बहादुर यादव जीते, दीप नरायन वर्मा (कांग्रेस) हारे
1989 अर्जुन सिंह यादव जीते, डा छबिनाथ सिंह ( जनता दल) हारे
2002 धनंजय सिंह जीते श्रीराम यादव (सपा) हारे 

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