प्रशासन हुआ शख्त:मां विंध्यवासिनी के नाम से वेबसाइट बना कर धोखाधड़ी करने वालो पर दर्ज होगा मुकदमा


मां विंध्यवासिनी के नाम पर वेबसाइट बनाकर भक्तों से धोखाधड़ी करने वालों पर मुकदमा दर्ज करने की तैयारी है। ऐसी तीन वेबसाइट को ब्लॉक करने के बाद तथ्यों व उसके माध्यम से हुए लेनदेन की जांच शुरू हो गई है। राजस्व टीम के साथ पुलिस की साइबर ब्रांच वेबसाइट के संचालन से जुड़े लोगों, उनके खातों में हुए लेनदेन की भी जांच करेगी। गड़बड़ी मिलने पर मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
वेबसाइट की जांच के लिए जिलाधिकारी के निर्देश पर आठ सदस्यीय टीम गठित कर जांच की जा रही है। विंध्याचल मंदिर में देश-विदेश काफी संख्या में लोगों की श्रद्धा है। कुछ लोगों द्वारा फर्जी वेबसाइट व फेसबुक पर पेज बनाकर श्रद्धालुओं से चंदा, सहयोग राशि मांगी जा रही है।ऐसी वेबसाइट पर दर्शन-पूजन, पूजा-पाठ आदि के लिए बाकायदा शुल्क तक तय कर दिया गया है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि विंध्य कॉरिडोर के निर्माण के लिए भी दान मांगा जा रहा है, जबकि सारा निर्माण शासन-प्रशासन के स्तर से कराया जा रहा है। ऐसी कई वेबसाइट व पेज इंटरनेट पर सक्रिय हैं। इसकी शिकायत पर जिलाधिकारी ने मामले की गंभीरता को देख टीम गठित कर जांच के आदेश दिया। तीन वेबसाइट को ब्लॉक करने के बाद उसके तथ्यों की जांच की जा रही है। साथ ही टीम इसमें शामिल लोगों को चिह्नित करने में भी जुटी है।
आठ सदस्यीय टीम द्वारा की जा रही जांच में ऐसी कई वेबसाइट का पता चला है। कमेटी का अध्यक्ष सीओ सिटी परमानंद कुशवाहा को बनाया गया है। तहसीलदार सदर व विंध्य विकास परिषद के सदस्य अरुण कुमार गिरी को संयोजक बनाया गया है।

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