भ्रष्टाचार का मुद्दा लेकर पूर्वांचल विश्वविद्यालय शिक्षक संघ और कर्मचारी संघ आमने सामने, आखिर जिम्मेदार कौन?

जौनपुर। पूर्वांचल विश्वविद्यालय के सहायक कुलसचिव अजीत कुमार सिंह एवं पूर्वांचल विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष विजय कुमार सिंह सहित अन्य पदाधिकारियों के साथ परीक्षा केंद्र को लेकर हुए विवाद में अब पूर्वांचल विश्वविद्यालय कर्मचारी संगठन और शिक्षक संघ आमने सामने आरोप प्रत्यारोप करते हुए जंग के मैदान में आ गया है। शिक्षक संघ इस पूरे प्रकरण सहित विश्वविद्यालय के भ्रष्टाचार को लेकर प्रदेश सरकार के जिम्मेदार अधिकारियो तक पहुंचाने की चुनौती दे रहा है तो कर्मचारी भी पीछे हटने के मूड में नहीं वह भी शिक्षको और शिक्षक संघ के लोंगो की कारस्तानियों को सरकार के मंत्री और कुलाधिपति के समक्ष रखने की तैयारी कर रहे है। इसमें अब देखना यह है कि किसकी पराजय और किसकी जीत होती है।
मिली खबर के अनुसार विगत 03 मार्च को शिक्षक और छात्रो की समस्याओ को लेकर शिक्षक संघ के अध्यक्ष विजय कुमार सिंह सहित पदाधिकारी गण परीक्षा केंद्र बनाए जाने को लेकर शिकायत करने विश्वविद्यालय परिसर में पहुंचे थे। उसी समय सहायक कुलसचिव अजीत कुमार सिंह से शिक्षक नेताओ से गर्मा गरम बहस हो गयी और शिक्षक नेतागण विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारे बाजी शुरू कर दबाव बनाने लगे। शिक्षक संघ के रूख को देखकर विश्वविद्यालय के कर्मचारी संगठन के नेतृत्व में कर्मचारी भी सहायक कुलसचिव के पक्ष में विरोध में आ गये और आमने सामने हो गये इसके बाद शिक्षक नेताओ को विश्वविद्यालय में नहीं घुसने की चेतावनी दे डाली। फिर शिक्षक संघ के लोग परिसर के बाहर विश्वविद्यालय कर्मचारी संगठन और सहायक कुलसचिव के खिलाफ निन्दा प्रस्ताव पास किया और विश्वविद्यालय प्रशासन सहित कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार का आरोप जड़ दिया। इसको लेकर नाराज कर्मचारी भी शिक्षको की कलई खोलते हुए दो दो हाथ करने की चुनौती दे डाली है। इस घटना को लेकर शिक्षक संघ कुलपति से मिलने विश्वविद्यालय गया भी था लेकिन कुलपति को बाहर होने के कारण मुलाकात नहीं हो सकी ऐसा सूत्र बता रहे है।
इस घटना के बाद अब जरिए मीडिया शिक्षक संघ के लोग विश्वविद्यालय प्रशासन सहित यहां के कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार का सीधा आरोप जड़ते हुए कहते है कि विश्वविद्यालय परीक्षा शुल्क तो लेता है लेकिन परीक्षा के बाद परीक्षा फल का अभिलेख कालेजो के पास नहीं भेजता नहीं मार्कसीट आदि देता है जब सभी व्यवस्था आन लाइन है तो छात्रो का शोषण क्यों किया जा रहा है। इसके अलांवा परीक्षा के समय उड़ाका दल को लेकर आरोप लगाते हुए शिक्षक नेता कहते है कि आधी परीक्षाओ को बीत जाने के बाद उड़ाका दल के लोगो को लगाया जाता ऐसे में उड़ाका दल के खर्चे की चोरी की जा रही है। शिक्षक संघ के लोग यही नहीं रूके बल्कि परीक्षा परिणाम तैयार करने और घोषित करने लिए लगाई गई एजेन्सी पर सवाल खड़ा करते हुए विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक वीएन सिंह के उपर भ्रष्टाचार का आरोप जड़ रहे है। आरोप है कि कमीशन खोरी के चक्कर में घटिया किस्म की एजेन्सी को लगाया है जो परीक्षा परिणाम में भारी त्रुटियां करती है जिससे छात्र परेशान हो रहे है। इसके अलांवा और भी आर्थिक भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए प्रदेश सरकार से जांच की मांग शुरू कर दिये है।
शिक्षक संघ के इन आरोपो के जबाव में विश्वविद्यालय के कर्मचारी कहते है कि विश्वविद्यालय की शैक्षिक व्यवस्थाओ और नीतियों का संचालन समितियों के जरिए किया जाता है। व्यवस्थाओ को लेकर जितनी भी कमेटियां बनी है चाहे परीक्षा केन्द्र का निर्धारण हो अथवा परीक्षाओ को लेकर उड़ाका दल बनाने का हो अथवा जो भी कार्य हो सभी कमेटियों शिक्षक संघ के लोग ही रहते है।इन लोगो द्वारा अक्सर शिक्षको अथवा परीक्षा केंद्रो को बदलने का दबाव बनया जाता है इसके पीछे इनको आकंठ भ्रष्टाचार में रहने का स्पष्ट संकेत है।बिषयो की मान्यता और कालेज की मान्यताओ की जांच के नाम पर शिक्षक लोग जिस तरह से भ्रष्टाचार को फैलाये है उसे रोकने का प्रयास किया जाता है तो विश्वविद्यालय प्रशासन से लेकर कर्मचारियों पर दबाव बनाया जाता है। सहायक कुलसचिव अजीत कुमार सिंह ने नियमानुसार परीक्षा केंद्र बनाए और शिक्षक लोग अपनी जेब गरम कर गलत तरीके से परीक्षा केंद्र बनाने का दबाव बना रहे है ।दबाव न मानने पर अब आन्दोलन की धमकी दे रहे है।कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष और महामंत्री ने कहा है कि कर्मचारी अथवा विश्वविद्यालय प्रशासन किसी भी दबाव में नहीं आयेगा शासन की मंशानुरूप नियमानुसार व्यवस्था का संचालन होगा। जरूरत पड़ी तो इन भ्रष्टाचारी शिक्षको की पोल शासन में पहुंच कर खोली जायेगी। दूसरी ओर सहायक कुलसचिव अजीत कुमार सिंह ने भी चुनौती दिया है कि शिक्षको के आरोपो की जांच करा ली जाये आरोप सिद्ध होगा तो नौकरी से त्यागपत्र दे दिया जायेगा।
यहां पर एक बात साफ है कि विश्वविद्यालय के कर्मचारीगण और अधिकारी आकंठ भ्रष्टाचार में लिप्त रहे तो शिक्षक संघ के जिम्मेदार लोग अभी तक क्यों चुप थे।उन्हे छात्र हितो की याद पहले क्यों नहीं आयी। जब विश्वविद्यालय की सभी कमेटियों में यहां तक की सबसे महत्वपूर्ण कमेटी कार्य परिषद की कमेटी में शिक्षको की सहभागिता है तो वहां पर भ्रष्टाचार के मुद्दे क्यों नहीं उठाये जा सके।आखिर किसके दबाव में शिक्षक संघ के लोग विश्वविद्यालय प्रशासन के भ्रष्टा कारनामों के मुद्दे पर चुप रहे अथवा शिक्षको के चुप रहने का कारण क्या था।इस तरह के तमाम सवालात विश्वविद्यालय में किसी भी तरह के भ्रष्टाचार के लिए शिक्षको को भी सवालों के कटघरे में खड़ा करते है।

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