पूर्व मंत्री स्व. पारस नाथ यादव के निधनोपरान्त सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का न आने से कार्यकर्ताओं में दिखी नाराजगी



जौनपुर।  समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्य एवं सपा सरकार में मंत्री रहने वाले पारस नाथ यादव के निधनोपरान्त सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष का जौनपुर आकर शोक संवेदना व्यक्त करने के बजाय शोसल मीडिया के माध्यम से शोक जताने को लेकर स्व. पारस नाथ के त्रयोदशा कार्यक्रम में सपा जनो के बीच चर्चा का बिषय रहा वही सपा के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने नाराजगी भी जताया और राष्ट्रीय अध्यक्ष के इस व्यवहार की आलोचना भी किया।
यहाँ बता दे कि पारस नाथ यादव के निधन की खबर के चर्चा उठी कि अखिलेश यादव उनकी अंत्येष्टि में शामिल होगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बाद कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा उठी कि अखिलेश यादव स्व. पारस नाथ के प्रति शोक संवेदना व्यक्त करने आ सकते है नहीं आये। फिर चर्चा हुईं त्रयोदशा कार्यक्रम में आयेगे नहीं आये इसके बाद जिले के आम कार्यकर्ताओं में अपने ही राष्ट्रीय अध्यक्ष के खिलाफ निराशा जगी और  असन्तोष पैदा हो गया है।

 त्रयोदशा कार्यक्रम में जनपद ही नहीं पूर्वांचल के तमाम राजनैतिको की उपस्थिति स्व. पारस नाथ के लोकप्रियता एवं ताकत को बयां कर रही थी। पूर्वांचल के नेताओं के साथ जिले मेंजनपद के कार्यकर्ताओं का हुजूम इकट्ठा हो गया था। सभी की निगाहें राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को तलाशती रही न दिखाई देने पर आलोचना शुरू कर देती थी।
त्रयोदशा कार्यक्रम स्थल पर उपस्थिति सपा कार्यकर्ताओं का लगभग एक सवाल था कि स्व. पारस नाथ जी जब राजनीति शुरू किये और अपने जीवन के अन्तिम दिन तक सपा के साथ रहे और मुलायम सिंह यादव तथा अखिलेश यादव के वफादार बने रहे हमेशा सपा और मुलायम परिवार का गुणगान करते रहे लेकिन उनके मरणोपरांत सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जौनपुर आना तक उचित नहीं समझे है । बातें तो यहाँ तक हुईं कि जो पारस नाथ की उपेक्षा कर सकता उसकी नजर में आम कार्यकर्ताओं की क्या हैसियत होगी सहज अनुमान लगाया जा सकता है ।
एक बृद्ध कार्यकर्ता ने कहा कि हम लोग अपनी जान की बाजी लगा कर सपा और मुलायम परिवार को सत्ता तक पहुंचाने का काम करते है और आज हमारे बीच का शेरे पूर्वांचल जीवन पर्यन्त सपा की अलख जगाने वाला साथी दुनियां छोड़ कर चला गया तो अखिलेश यादव को इतना समय नहीं मिला कि आ कर शोक जता सके। शोसल मीडिया पर शोक व्यक्त करते हैं यह दुःखद और खेदजनक भी है। इस कार्यकर्ता ने यह भी कहा कि आज मुलायम सिंह जी यदि चलने फिरने लायक होते तो जौनपुर जरूर आते , पिता से वरासत में मिली राजनैतिक कुर्सी पर बैठे अखिलेश यादव को अपने लोगों का दर्द पता नहीं है जो पार्टी के लिए शुभ संकेत नहीं है ।
कार्यकर्ताओं के मन में उपजा गुस्सा इतना तो संकेत किया कि स्व. पारस नाथ जी अपने कार्यकर्ताओं से कितना लगावा रखते थे। यदि यह गुस्सा लम्बे समय तक कार्यकर्ताओं के मन में जमा रहा तो इसके राजनैतिक मायने भी जनपद जौनपुर में देखने को मिल सकते है कार्यकर्ताओं के बीच इसकी भी चर्चा थी। जो भी हो लेकिन अब जौनपुर में सपा की राजनीति पारस नाथ विहीन हो गयी है। जिसकी भरपाई अब संभव नहीं है।
हाँ सपा जन प्रसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव की सराहना किये कि शिवपाल यादव को सपा से अलग होने पर पारस नाथ जी उनके साथ नहीं गये फिर भी व्यक्तिगत संबन्धों को तवज्जों देते हुए वर्षात के बीच जौनपुर त्रयोदशा कार्यक्रम स्थल पर पहुंच कर अपनी शोक संवेदना व्यक्त किये हर सपाई कार्यकर्ता शिवपाल यादव के इस पहल की तारीफ करता दिखा साथ ही इसे मानवीय संवेदना बताया है। 

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