हनुमान अष्टक,साहित्य में जानें कैसे होती है हनुमान जी की स्तुति



भार उतारि द पार उतारि द,कैसे बिना उतरे पतियाई।।
 नांउ उलार बा घाटे लगाई द ,लागत बा डर डूबि न जाई।।
तेज तुफान विपत्ति के आंधी से ,लेत न नाथ तु जान बचाई।।
अर्चन वंदन हे शशि नंन्दन हे, बजरंग तोहार दोहराई।।

गाई के हारि गयें देवता सब ,हे गुन आगर का गुन गाई।।
को नहिं जानत है जग में,जग जाहिर बा तोहरि प्रभुताई।।
राम  सिया गुन गावैइ गिरीशक  बारम्बार  बखान बड़ाई।।
राखिल लाज करा उपकार तू , ,हे बजरंग तोहार दोहाई।।

रोमैई रोम में राम बसैइं ,उर चीर के वीर दिहा तू देखाई।।
जीत लिहा जग जाहिर काम के राम सिया कैइ आशिष पाई।।
घोर विपत्ति कपारे गिरीश क,काटि द बन्धन धाइ गोसाई।।
हाथ बढ़ाई द पिन्ड छोड़ाई द,हे बजरंग तोहार दोहाई।।

नेह के नीर से पांउ पखारि के,भाउ क माला अउ फूल चढ़ाई।।
मेवा न बा मिसरी नहिं मोदक दीनदयाल का भोग लगाई ।।
मारूति नंन्दन चंदन बंन्दन, टीका सनेह क माथे लगाई।।
धाइ के आवा तू पार लगाव तू, हे बजरंग तोहार दोहाई।।

रूप अनूप तोहार प्रभु, लघु ते लघु    भूधराकार देखाई।।
तोरि दिहा अभिमान गुमान के,दानव दैत्य क मान घटाई।।
पाइ लिहा पद पंकज कैइ रज,राम के नाम क मंन्त्र जगाई।।
देर करा जिन,टेर सुना प्रभु, हे  बजरंग तोहार दोहाई।।

थाह नहीं बल बुद्धि विवेक क,नाथ अथाह कृपा रघुराई।।
देव ऋषि मुनि गान करैइ गुन, हे गुन सागर पार न  पाई।।
काल के काल हे अंजनी लाल,बेहाल गिरीश गोहार लगाई।।
मारूति नन्दन हे दुखभंजन, हे बजरंग तोहार दोहाई।।

अंजनि पूत हे राम क दूत, करैइ कर जोरि के काल बड़ाई।।
आस तोहार बा नास करा,प्रभु तीनउं ताप मना घबराई।।
संकट मोचन हे शिवलोचन, काटि द गाढ़ गिरीश क धाई।।
काल के गाल से जान बचाइल ,हे बजरंग तोहार दोहाई।।

लीलि लिहा तोहंई सुरजू के अउ, लांघि गया सगरा हरषाई।।
फूंकि दिहा सोनवां कैइ लंक के अक्षय के सुरधाम पठाई।।
भेंट कराया तुहिं सुगरीव भिभीषण राम गिरीश मिताई।।
काटि द संकट ,संकट मोचन हे बजरंग तोहार दोहाई।।

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