यूपी के गांव में जमीनी विवाद खत्म करने के सरकार ने बनायी यह योजना,नहीं होगी मुकदमें की नौबत


उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने गांवों में जमीन विवादों को जड़ से ही खत्म करने की योजना बना ली है। गाटे के सह खातेदारों के बीच अपने-अपने हिस्से की जमीन के बंटवारे के लिए अब मुकदमेबाजी की नौबत नहीं आएगी। सह खातेदारों के बीच हिस्से का बंटवारा अब पंचायत स्तर पर ही हो जाएगा। राजस्व परिषद ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि जिन राजस्व गांवों में खतौनी का पुनरीक्षण और अंश निर्धारण का काम पूरा किया जा चुका है, वहां सह खातेदारों के बीच गाटों के भौतिक विभाजन की योजना तैयार कर उसे अमली जामा पहनाया जाए।
गांवों में अक्सर मिनजुमला यानी मिले-जुले खातेदारों वाले गाटे होते हैं। एक ही गाटे में कई सह खातेदार होते हैं लेकिन यह निश्चित नहीं होता है कि इसमें किसका हिस्सा किस तरफ है। इससे जमीन के बंटवारे को लेकर आए दिन विवाद होते हैं। दिक्कत यह भी आती है कि यदि कोई अपना हिस्सा बेचना चाहे तो यह तय नहीं हो पाता कि वह किस तरफ की जमीन बेचे। ऐसा ही असमंजस जमीन खरीदने वाले के सामने भी होता है।
यदि उसने किसी व्यक्ति से कोई जमीन खरीदी तो बाद में उस गाटे का कोई अन्य सह खातेदार यह दावा कर सकता है कि वह भूमि तो उसके हिस्से की थी। सह खातेदारों के बीच जमीन के बंटवारे के लिए अभी एसडीएम के यहां मुकदमा दर्ज कराना पड़ता है। राजस्व विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार प्रदेश में मिनजुमला गाटों की जमीन के बंटवारे से जुड़े तकरीबन 20 हजार मुकदमे लंबित हैं।
उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता में सह खातेदारों के बीच गाटे के भौतिक विभाजन की व्यवस्था है। इसमें कहा गया है कि मिनजुमला गाटों का निर्धारित तरीके से भौतिक विभाजन किया जाएगा और मानचित्र व खसरा सहित राजस्व अभिलेखों को उसके मुताबिक संशोधित किया जाएगा। राजस्व संहिता नियमावली में इसका तरीका भी बताया गया है लेकिन इसे अब तक प्रदेश में लागू नहीं किया जा सका है।
प्रदेश में राजस्व गांवों की खतौनियों के पुनरीक्षण और गाटों में अंश निर्धारण का काम वर्ष 2017 से लगातार जारी है। लिहाजा आयुक्त एवं सचिव राजस्व परिषद मनीषा त्रिघाटिया ने अब जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि जिन गांवों में खतौनी पुनरीक्षण व अंश निर्धारण का काम पूरा कर लिया गया है, प्राथमिकता के आधार पर उन गांवों में मिनजुमला गाटों के भौतिक विभाजन की योजना तैयार कराते हुए उसके अनुसार राजस्व अभिलेखों को संशोधित कराया जाए। भविष्य में भी जिन गांवों में खतौनी पुनरीक्षण व अंश निर्धारण का कार्य पूरा होता जाए, वहां भी ऐसा किया जाए।

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