जानिए जेल से कब तक बाहर आ सकते है पूर्व सांसद धनंजय सिंह और क्या होगा उनका राजनैतिक भविष्य

जौनपुर। जिले के बाहुबली नेता एवं पूर्व सांसद धनंजय सिंह की रिहाई के लिए अनुमान लग रहे है  कि सोमवार अथवा मंगलवार तक जेल की सलाखो से बाहर आने की प्रबल संभावना है। शनिवार को आदेश तो आ गया था लेकिन प्रमाणित प्रति नहीं मिल सकी है। दूसरे दिन रविवार की छुट्टी है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि हाईकोर्ट के आदेश की पक्की नकल  सोमवार को मिलेगी  फिर पूर्व सांसद की रिहाई सोमवार या मंगलवार तक ही संभव हो सकती है।
धनंजय सिंह को शनिवार को ही जौनपुर से बरेली जेल शिफ्ट कर दिया गया है। सोमवार को ही प्रमाणित प्रति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। इसके बाद बेल बॉन्ड भरे जाने की औपचारिकताएं पूरी होंगी। इसके बाद ही धनंजय सिंह जेल के बाहर आ सकते हैं। 
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नमामि गंगे के प्रोजेक्ट मैनेजर अभिनव सिंघल का अपहरण कराने, रंगदारी मांगने, गालियां और धमकी देने के आरोपी पूर्व सांसद धनंजय सिंह  की जमानत मंजूर कर ली है, लेकिन उनको ट्रायल में कोर्ट से मिली सात साल की सजा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। इससे अब तय हो गया है कि धनंजय सिंह के राजनीतिक भविष्य पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं और राजनैतिक सफर पर यहीं पर विराम लग जाएगा।
हालांकि धनंजय सिंह अपने पत्नी के रास्ते राजनीति में खुद को बनाए रख सकते है।
उनकी पत्नी को बसपा ने जौनपुर 73 लोकसभा क्षेत्र से अपना उम्मीदवार बनाया है। पूर्व सांसद धनंजय के अधिवक्ता कार्तिकेय सरन ने बताया कि जमानत के बावजूद धनंजय चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। क्योंकि हाईकोर्ट ने जमानत तो दी है लेकिन सजा पर रोक नहीं लगाई है। संभव है कि विशेष अदालत से मिली सजा के निलंबन को लेकर धनंजय सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को दोनो पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद उनकी जमानत पर फैसला सुरक्षित कर लिया था। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति संजय कुमार सिंह की एकल पीठ कर रही थी। गौरतलब है कि अपहरण मामले में पूर्व सांसद धनंजय सिंह ने जौनपुर की विशेष अदालत से मिली सात साल की सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दाखिल कर अंतिम फैसला आने तक सजा पर रोक लगाए जाने और जमानत पर जेल से रिहा किए जाने के लिए हाईकोर्ट में मांग की थी। जमानत तो मिल गई लेकिन आदेश पर स्थगन नहीं मिला जो उनके राजनैतिक सफर पर विराम लगाने का संकेत दे रहा है। हालांकि हाईकोर्ट के न्यायाधीश ने अपने 35 पेज के आदेश में जिस तरह से धनंजय सिंह के अपराधिक इतिहास का जिक्र किया और टिप्पणी की है उससे संकेत साफ है कि सजा के रोक पर धनंजय सिंह को किसी भी कोर्ट से राहत संभव नहीं होगा।

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