अधिवक्ता ने पत्नी वियोग में किया आत्महत्या पुलिस ने की विधिक कार्यवाई ,जानें घटना का कारण



जौनपुर। थाना खेतासराय क्षेत्र स्थित अब्बोपुर गांव में एक अधिवक्ता ने पत्नी व सालों से हुए विवाद के चलते आज सुबह कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। दरवाजा न खुलने पर पड़ोस के एक व्यक्ति की मदद से दरवाजा तोड़कर शव को नीचे उतारा गया। मौके पर एक सुसाइड नोट पड़ा मिला। जिसमें लिखा है कि मौत का जिम्मेदार दोनों साले है। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस अन्य विधिक कार्रवाई कर दी है। 
मिली जानकारी के अनुसार अब्बोपुर गांव के 30 वर्षीय संतोष कुमार बिन्द पुत्र बंशूराम बिन्द जौनपुर दीवानी न्यायालय में अधिवक्ता थे। उनकी पत्नी प्राथमिक विद्यालय बरंगी में सहायक अध्यापिका हैं। दोनों की शादी के पांच साल बाद भी उन्हें कोई औलाद नहीं है।
 घटना से एक दिन पूर्व मृतक अधिवक्ता के साले और ससुर उसके घर पर आए थे। किसी बात को लेकर अधिवक्ता और उसके साले के बीच काफी बहस हुई थी। बात इतनी बढ़ गई कि संतोष कुमार के ससुर अपनी बेटी को साथ लेकर मायके चले गए। घटना से रोती बिलखती मृतक की मां और ग्रामीणों की माने तो शुक्रवार की सुबह संतोष बिस्तर से उठकर बाहर टहलकर वापस लौटा। इस बीच अपनी मोबाइल पर किसी से लगातार बात करता रहा। बात करते वह घर के दूसरी मंजिल पर अपने कमरे में चला गया। मां चाय लेकर जब कमरे के बाहर पहुंची तो कमरा अंदर से बंद मिला। कई आवाज लगाने पर कमरा अंदर से नहीं खुला तो बगल में एक मोबाइल टावर पर रहे कर्मचारी को बुलाया। दरवाजा तोड़ा गया तो स्टूल के सहारे साड़ी के फंदे से संतोष का शव लटकता मिला। इकलौते बेटे का शव देख उसकी मां दहाड़े मारकर चीखने चिल्लाने लगी। टावर के कर्मचारी की मदद से शव को नीचे उतारा गया। 

मौके से एक सुसाइड नोट मिला। जिसे पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया। सुसाइड नोट में मृतक ने अपनी मौत का जिम्मेदार अपनी पत्नी के दो भाइयों को ठहराया है। पुलिस मामले की जांच पड़ताल कर रही है। प्रभारी निरीक्षक राजेश यादव ने बताया कि अभी कोई तहरीर नहीं मिली है। सुसाइड नोट का मामला जांच का विषय है।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

मुम्बई से आकर बदलापुर थाने में बैठी प्रेमिका, पुलिस को प्रेमी से मिलाने की दी तहरीर, पुलिस पर सहयोग न करने का आरोप

आइए जानते है कहां पर बारिश के दौरान आकाश से गिरी मछलियां, ग्रामीण रहे भौचक

पूर्वांचल की राजनीति का एक किला आज और ढहा, सुखदेव राजभर का हुआ निधन