देश और व्यक्ति के विकास के लिए मातृभाषा जरूरी: प्रो. गिरिश्वर मिश्र


मातृभाषा से ही व्यक्ति के बीच सर्वोत्तम संवाद: प्रो. निर्मला एस. मौर्य


जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय एवं गुरु नानक कॉलेज स्वायत्तशासी चेन्नई के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को  सात दिवसीय ऑनलाइन अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का समापन समारोह  हुआ। इसका मुख्य विषय था शिक्षण, शोध एवं रोजगार में मातृभाषा की उपादेयता। कार्यशाला के समापन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा के पूर्व कुलपति प्रो. गिरिश्वर मिश्र ने कहा कि राष्ट्र की पहचान अपनी भाषा  से होती है। भाषा जीवित तभी रहती है जब उसका उपयोग होता है। भाषा के इस्तेमाल न करने से संस्कृति का नाश हो जाता है। उन्होंने कहा कि देश और व्यक्ति के विकास के लिए मातृभाषा जरूरी है। हम अपने ज्ञान, विचार अभिव्यक्ति का प्रस्तुतीकरण मातृभाषा में करते हैं तो उसमें मौलिकता दिखती है। उन्होंने कहा कि मातृभाषा के प्रति हमें जितना सजग रहना चाहिए उतना हम नहीं हैं, यह चिंता का विषय है।
समापन समारोह की अध्यक्षता  करते हुए वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. निर्मला एस. मौर्य ने कहा कि मातृभाषा में शिक्षण से ही व्यक्ति, समाज और राष्ट्र का विकास होता है। उन्होंने कहा कि भाषा से ही व्यक्ति के बीच सर्वोत्तम संवाद होता है। उन्होंने मां और शिशु की शिक्षा के बारे में विस्तार से बताया। साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर जो पूर्वांचल विश्वविद्यालय में उन्होंने शुरू किया है उसकी सफलता पर भी चर्चा की।
इस अवसर पर गुरु नानक महाविद्यालय चेन्नई की उप प्रधानाचार्य डा.एन.सी. राजश्री ने कहा कि जब बच्चा जन्म लेता है और मां उससे संवाद करती हैं वहीं मातृभाषा होती है। अगर अंग्रेजी भाषा आवश्यक है तो मातृभाषा महत्वपूर्ण है।
गुरु नानक महाविद्यालय चेन्नई के आइक्यूएसी समन्वयक और भाषा संकायाध्यक्ष डॉ. स्वाति पालीवाल ने कहा कि मातृभाषा को सशक्त बनाने के लिए लिए ही अन्तर्राष्ट्रीय ‌मातृदिवस मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि मातृभाषा को लेकर भम्र की स्थिति है। हमलोग अपनी मातृभाषा को अपने दिमाग में रखकर अनुवाद करते हैं जो कि चिंताजनक है।
गुरु नानक महाविद्यालय की शैक्षणिक संकायाध्यक्ष डॉ. एस. सावित्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का मुख्य उद्देश्य मातृभाषा को बढ़ावा देना है। उन्होंने तकनीकी के क्षेत्र में मातृभाषा के उपयोग को विस्तार से बताया।
कार्यशाला डॉ. मनोज कुमार पांडेय और डॉ. डाली के संयोजकत्व में आयोजित  है। संचालन और अतिथियों का परिचय डॉ डॉली और धन्यवाद ज्ञापन प्रो. अजय प्रताप सिंह ने किया।
इस अवसर पर प्रो. अजय द्विवेदी, प्रो.‌वंदना राय, प्रो.देवराज सिंह,  डॉ. रसिकेश, डॉ. सुनील कुमार‌ मीडिया प्रभारी, डॉ अवध बिहारी सिंह, डॉ.प्रमोद यादव, धीरेन्द्र चौधरी, मंगल प्रसाद यादव,  श्रीमती गुड़िया चौधरी, दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा से रेखा वर्मा, डॉ. विजय पाटिल संदीप कुमार, सुशील कुमार आदि  ने  प्रतिभाग किया।

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