डिजिटल क्राइम: सीआईडी बनकर धमकी देकर किया ठगी,पुलिस नहीं दर्ज की एफआईआर मामला अब एसपी दरबार में


आजमगढ़ जिले में साइबर ठगी का एक नया मामला सामने आया है, जिसमें डिजिटल अरेस्ट करके पीड़ित से पैसे निकलवा लिए जाते हैं। बुधवार को गंभीरपुर थाना क्षेत्र के टेकमलपुर गांव निवासी मोतीलाल जब ऐसा ही एक मामला लेकर एसपी ऑफिस पहुंचे। उन्होंने शिकायती पत्र सौंपकर गंभीरपुर पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाया है।
मोती लाल ने बताया कि मेरा लड़का अनंत यादव ओमान में रहता है। छह मार्च को मेरे मोबाइल पर फोन आया। बात करने वाले ने खुद को सीआईडी में होने की बात कही। उसने पूछा कि आपके लड़के का नाम अनंत है और ओमान में रहता है। उसे कुछ लोगों ने मारा पीटा है। हमने उसे एंबेसी में छिपाकर रखा है। बाहर मीडिया वाले खड़े हैं अगर वह उनकी नजर में आया तो उसे 25 सालों की सजा हो सकती है। 
उन लोगों ने कहा कि अगर बच्चे को छुड़वाना है तो फाइन के तौर पर कुछ पैसे एक एकाउंट में जमा करने होंगे। विश्वास के तौर पर तुम्हारे बेटे से बात कराता हूं। इसके बाद उन्होंने किसी से मेरी बात कराई जिसकी आवाज बिल्कुल मेरे बेटे के समान थी। उन्होंने कहा कि मेरे पास आधे घंटे से अधिक का समय नहीं है। फोन तब तक काटना मत जब तक पैसे ट्रांसफर नहीं कर देते।
इसके बाद मेरे द्वारा उनके दिए एकाउंट में दो लाख 20 हजार रुपये चेक से स्थानांतरित कर दिए गए। कुछ देर बाद जब बेटे से बात हुई तो उसने बताया कि वह पूरी तरह से ठीक है। उसे कुछ नहीं हुआ है तब जाकर पता चला कि उसके साथ धोखाधड़ी हुई है। तब वह रानी की सराय स्थित साइबर थाना पहुंचा। जहां खाते को बंद किया गया, लेकिन तब तक वह एक लाख रुपये निकाल चुका था।
वहीं, रानी की सराय थाने में FIR के लिए तहरीर दी, फिर भी मुकदमा दर्ज नहीं हुआ। मोती लाल यादव ने एसपी से उक्त मामले में उचित कार्रवाई किए जाने की मांग की। इस संबंध में एसपी ट्रैफिक विवेक त्रिपाठी ने बताया कि डिजिटल अरेस्ट एक नए तरीके का अपराध है, जिसमें किसी व्यक्ति को फोन कॉल आती है। 
इसमें बताया जाता है कि उसका रिश्तेदार या उसका बेटा, कोई पति-पत्नी घायल हो गए हैं अथवा उनके साथ कोई घटना हो गई है उनको पुलिस ने पकड़ लिया है। ऐसे करके उनको कई घंटे तक फोन पर उलझाए रखते हैं और अंत में कहते हैं कि मेरे खाते में पैसा डाल दो। आपके बेटे के लिए इलाज की आवश्यकता है या आपके बेटे या पत्नी को छोड़ने के लिए आवश्यकता है। इसमें कई घंटे तक उस व्यक्ति पर नजर रखी जाती है।
फोन काल से हटने नहीं दिया जाता है। जिससे पीड़ित व्यक्ति अपने रिश्तेदार से संपर्क नहीं कर पाता है। इसलिए इसको डिजिटल अरेस्ट कहा जाता है। उन्होंने लोगों से अनुरोध किया कि अगर इस तरह की काल उनके मोबाइल पर आती है तो घबराने की जरूरत नहीं है सीधे पुलिस से संपर्क करें डायल 112 पर सूचना दें या थाने पर संपर्क कर सकते हैं।

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