परिषद को राजनीति से रखे दूर, राजनीति करने वाले कर्मचरी होगे बाहर 31 अक्टूबर की बैठक में आन्दोलन का निर्णय- जे एन तिवारी


राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष जेएन तिवारी ने परिषद को राजनीतिकरण की प्रक्रिया से अलग रखने की अपील की है। उन्होंने यह भी कहा कि कर्मचारी एकजुट होकर राजनीति करने वाले कर्मचारी नेताओं को बाहर का रास्ता दिखाएं। इस संबंध में 31 अक्टूबर को बैठक में आंदोलन का निर्णय लिया जाएगा। असल में, परिषद के राजनीतिकरण का रास्ता स्व. बीएन सिंह के समय में खुला था जब वे परिषद का अध्यक्ष रहते हुए विधान परिषद सदस्य भी बन गए और उन्होंने एमएलसी होने के बाद भी परिषद का अध्यक्ष पद नहीं छोड़ा। उसी तर्ज पर अब संयुक्त परिषद के एक और गुट के अध्यक्ष जो पहले एमएलसी का चुनाव लड़े ,उस समय उन्होंने भाजपा से साठगांठ करने का बहुत प्रयास किया लेकिन, असफल होने के बाद अब उन्होंने सपा का दामन थाम लिया है।

जेएन तिवारी ने कहा कि कर्मचारियों का भला किसी भी पार्टी से होने वाला नहीं है। सपा ने अपने शासनकाल में पुरानी पेंशन बहाल नहीं किया। अब जब वे विपक्ष में है तो उनको कर्मचारियों की याद आ रही है और राज्य कर्मचारियों को लुभाने का प्रयास किया जा रहा है। तिवारी ने बताया कि केंद्र में 2014 तक कांग्रेस सत्ता में थी लेकिन, पुरानी पेंशन बहाली पर कोई निर्णय नहीं लिया गया, 2005 में मुलायम सिंह के मुख्यमंत्रित्व काल में प्रदेश के कर्मचारियों से पुरानी पेंशन छीन ली गई। विधानसभा के सामने धरनास्थल मायावती की सरकार में छीना गया, विधानसभा के सामने धरना प्रदर्शन कर रहे राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के सदस्यों पर लाठीचार्ज किया गया।

कल्याण सिंह ने प्रदेश के कर्मचारियों से नकदीकरण छीना तथा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भर्ती पर रोक लगा दिया। केंद्र की अटल सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों से 2004 में पुरानी पेंशन छीन लिया। प्रदेश की योगी सरकार में भी कर्मचारियों का नगर प्रतिकर भत्ता एवं कई अन्य भत्ते छीन लिए गए। ऐसे में कोई भी पार्टी ऐसी नहीं है जो कर्मचारियों के हित के लिए काम कर रही हो। कर्मचारियों को जो कुछ मिला है, वह उनके अपने संघर्ष से ही मिला है और आगे भी जो कुछ मिलेगा उसके लिए कर्मचारियों को संघर्ष करना पड़ेगा। 

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