चेयरमैन केन्द्रीय उपभोक्ता भंडार की साजिश से करोड़ रुपए की जमीन के घोटाले का खेल,चल रही है जांच



जौनपुर। जनपद के केंद्रीय उपभोक्ता भंडार में चेयरमैन एवं एक व्यवसायी की साजिश से करोड़ो रूपये के जमीनी घोटाले का खेल होने की खबर प्रकाश में आयी है। हलांकि अब केंद्रीय उपभोक्ता भंडार के वोर्ड की शिकायत पर जिलाधिकारी द्वारा पूरे मामले की जांच बैठा दी गयी है। केंद्रीय उपभोक्ता भंडार के घोटाले की जांच एस डी एम सदर/ ज्वाइंट मजिस्ट्रेट हिमांशु नागपाल के द्वारा किये जानें की खबर है। 
यहां बता दे कि केंद्रीय उपभोक्ता भंडार की कलेक्ट्रेट चौराहा के पास सिविल लाइन मार्ग पर बेस कीमती जमीन है। जिसमे एक व्यवसायी आधुनिक जलपान गृह भी किराये पर चला रहे है। इस प्रतिठान के मालिक द्वारा आस पास की बेसी कीमती करोड़ो रूपये की जमीन पर सरकारी अभिलेख में कुछ हेरा फेरी कर कब्जा जमा रखे है। जिसके बाबत सिविल कोर्ट में बशिष्ट नरायन बनाम उपभोक्ता भंडार बाद विचाराधीन रहा। इसमें खेल हुआ कि उपभोक्ता भंडार के चेयरमैन आधुनिक जलपान गृह के स्वामी से मिलकर बोर्ड की सहमति के बगैर ही कोर्ट में जाकर सुलह कर लिया। कहा जाता है कि इस सुलह पर हस्ताक्षर बनाने के लिए चेयरमैन ने व्यवसायी से लम्बी धनराशि की वसूली भी किया है। 
उपभोक्ता भंडार के चेयरमैन द्वारा सुलह करने के बाद आधुनिक मिष्ठान के मालिक ने एक पक्षीय आदेश भी अपने पक्ष में पारित करा लिया। इस घोटाले की जानकारी बोर्ड के सदस्यो होते ही हडकंप मच गया बोर्ड के सदस्यों ने पूरे जाल फरेब और घटना क्रम से सिविल कोर्ट को अवगत कराते हुए फैसला बदलने का आग्रह किया। साथ ही शिकायती पत्र जिलाधिकारी को देते हुए यहां के घोटाले की जांच कराने की मांग किया। जिस पर जिलाधिकारी ने सच को बाहर लाने के लिए ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/एसडीएम सदर हिमांशु नागपाल को जांच अधिकारी नामित कर दिया है। डीएम के आदेशानुसार ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने जांच भी शुरू कर दिया है। दूसरी ओर सिविल कोर्ट भी अपने फैसले पर पुनर्विचार शुरू कर दिया है।
जांच अधिकारी के जांच प्रक्रिया के दौरान एक बात यह भी सामने आयी है कि उपभोक्ता भंडार के पास सरकारी सचिव और कर्मचारी रहने के बावजूद चेयरमैन कार्यवाही रजिस्टर के साथ सभी तरह के रजिस्टर आदि अपने कब्जे में घर ले जा कर रख लिये है और उसमें मनमाने प्रस्ताव लिखने से लेकर बोर्ड के सदस्यो का फर्जी हस्ताक्षर आदि बनाने तक खेल होने की संभावनाए व्यक्ति की जा रही है। खबर है कि जांच अधिकारी ने सभी रजिस्टर अपने पास मांगा है। यहां बताना जरूरी है कि केन्द्रीय उपभोक्ता भंडार के नियमावली में उल्लेख है कि बगैर बोर्ड की सहमति और कार्यवाही रजिस्टर पर प्रस्ताव लिखे सभी सदस्यो हस्ताक्षर के बगैर चेयरमैन अकेले कोई भी काम नहीं कर सकेगा। इसके बाद भी बिना किसी बैठक को कराये ही आधुनिक जलपान गृह के मालिक से सिविल कोर्ट के मुकदमा बशिष्ट नरायन सिंह बनाम केन्द्रीय उपभोक्ता भंडार में सुलह कर लिया गया और व्यवसायी करोड़ो की जमीन को हथियाने में सफल रहा। हलांकि मामला जांच प्रक्रिया के दायरे में आ गया है। अब देखना यह है कि बोर्ड के सदस्य करोड़ो रूपये कीमत की बचाने में सफल होते है अथवा चेयरमैन की साजिश से मिली जमीन पर आधुनिक मिष्ठान भंडार के व्यवसायी अपना कब्जा बरकार रखने में सफल हो जाते है। बोर्ड के एक सदस्य ने नाम गोपनीय रखने की शर्त पर बताया कि जांच प्रक्रिया पूरा होने के पश्चात घोटाला काण्ड में शामिल जिम्मेदारो के खिलाफ विधिक कार्यवाई भी संभव है।
यहां एक बात यह भी बताना जरूरी है कि उपभोक्ता भंडार के वर्तमान चेयरमैन भाजपा के कार्यकर्ता है तो व्यवसायी जी भाजपा के प्रबल विरोधियों में शामिल है समाजवादी पार्टी से नाता रखते है। 

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