सांसद वरूण गांधी आखिर अपनी सरकार को लगातार कटघरे में क्यो खड़ा कर रहे है। सांसदो की सुविधायें खत्म करने की उठाई मांग


सांसद वरुण गांधी विगत काफी समय से अपनी ही सरकार पर हमलावर है। उनके किसी भी बयान को भाजपा सरकार गम्भीरता से लेने से परहेज कर रही है। आज बुधवार को ट्विटर के जरिए फिर हमलावर होते हुए लिखा कि श्री सुशील मोदी ने सदन (संसद) में ‘मुफ्तखोरी की संस्कृति’ खत्म करने पर चर्चा का प्रस्ताव रखा है। पर जनता को मिलने वाली राहत पर अंगुली उठाने से पहले हमें अपने गिरेबां में जरूर झांक लेना चाहिए। क्यों न चर्चा की शुरूआत सांसदों को मिलने वाली पेंशन समेत अन्य सभी सुविधाएं खत्म करने से हो?


सांसद इस मुद्दे को काफी समय से उठाते रहे हैं। जब से वह सांसद बने, उन्होंने स्वयं वेतन व अन्य सुविधाएं नहीं लीं। साथ ही अन्य सांसदों से भी वह ऐसा अनुरोध सांसद बनने के बाद से लगातार करते रहे हैं। सांसद ने एक अन्य ट्वीट किया, जिसमें उन्होंने घरेलू गैस की बढ़ती कीमतों पर चिंता जताई।

सांसद ने ट्विटर पर लिखा कि पिछले पांच सालों में प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के 4.13 करोड़ लोग एलपीजी की सिंगल रीफिलिंग का खर्च नहीं उठा सके, जबकि 7.67 करोड़ लोगों ने इसे केवल एक बार रीफिल कराया। सांसद ने लिखा कि घरेलू गैस की बढ़ती कीमतें और नगण्य सब्सिडी के साथ गरीबों के 'उज्ज्‍वला के चूल्हे' बुझ रहे हैं। सवाल उठाया कि ‘स्वच्छ ईंधन, बेहतर जीवन’ देने के वादे क्या ऐसे पूरे होंगे?


सांसद ने इसके साथ ही संसद में प्रस्तुत  की गई केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की उस रिपोर्ट को भी ट्विटर पर अपलोड किया है, जिसमें वर्ष 2017-18 से लेकर 2021-22 तक देश में प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के तहत गैस रीफिल के आंकड़े दिए गए हैं।


साथ ही इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 21 मई 2022 से उज्जवला योजना के लाभार्थियों को 14.2 किग्रा के गैस सिलिंडर की प्रति रीफिल पर 200 रुपये की सब्सिडी उनके खातों में भेजी जाएगी। सब्सिडी का लाभ वित्तीय वर्ष में 12 सिलिंडरों पर देय है।

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