अशोका इंस्टीट्यूट में तीन दिवसी अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार ‘टेक यात्रा’ का शुभारंभ


खुशहाली बढ़ाने के लिए वैल्यू एडेड कोर्स शुरू करेगा एकेटीयूः प्रो.पीके मिश्र

वाराणसी। अशोका इंस्टीट्यूट आफ इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट में सोमवार को तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार-टेक यात्रा का शुभारंभ हुआ। इस मौक पर बड़ी संख्या में मौजूद टीचर्स और स्टूडेंट्स को संबोधित करते हुए डा.एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.पीके मिश्र ने कहा कि लोगों के पास धन तो बढ़ रहा है, लेकिन प्रसन्नता घट रही है। सामाजिक मूल्यों को बढ़ाने के लिए एकेटीयू जल्द ही वैल्यू एडेड कोर्स शुरू करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है।
प्रो.मिश्र ने कहा कि समाज में हैपीनेस को बढ़ाने के लिए हम एक नया कोर्स लांच लांच करना चाहते हैं। यह एक ऐसा कोर्स होगा वो बताएगा कि आपने अपनी खुशहाली के लिए कितना समय दिया। साल 2022 के लिए संयुक्त राष्ट्र की विश्व खुशी रिपोर्ट में भारत का स्थान 136 वां है। साल 2021 में भारत की रैंक 139 थी।  इस प्रकार भारत ने अपनी रैंक में तीन स्थानों का सुधार किया है। उन्होंने कहा कि युद्ध और महामारी के  मुश्किल दौर में सामाजिक समर्थन और परोपकार में भी वृद्धि हुई हैं। कि विश्व गुरु समझे जाने वाले भारत को खुशी के पैमाने पर तभी ऊपर ले जाया जा सकेगा, जब हम इसके लिए सार्थक प्रयास करें। यह सवाल मुखर है कि आखिर खुशी किस चीज़ से मिलती है? किसको मिलती है? कब और कैसे मिलती है? आखिर ऐसा क्यों है कि भारतीयों के मस्तिष्क की खुशी घट रही है? यह स्थिति कब तक बनी रहेगी और इसके लिए एक हद तक ज़िम्मेदारी किसकी बनती है? आधुनिक विकास की ललक की कीमत आम भारतीय अपनी खुशी गंवाकर चुका रहे हैं। इंसान के हैपीनेस पर बहुत ध्यान देने की जरूरत है।  
एकेटीयू के कुलपति प्रो.मिश्र ने राष्ट्रभाषा का समर्थन करते हुए कहा कि जरूरत इस बात की है कि ज्ञान का अर्जन अपनी भाषा में हो। ट्रांसलेशन करने में जो ऊर्जा बर्बाद होती है वो अपनी भाषा में पढ़ाई होने पर बचेगी। जब समझ बनेगी तभी आप इनोवेशन कर सकेंगे। कंप्यूटर के प्रति जो ट्रैंड है उससे समस्याओं का समाधान संभव नहीं है। उससे नौकरियां मिल पाना कठिन होता जा रहा है। एकेटीयू अब स्टडेंट्स के अभिरुचि के हिसाब मेजर और माइनर डिग्री देगा। उन्होंने कहा कि तकनीकी शिक्षा को लेकर अशोका इंस्टीट्यूट शानदार प्रयास कर रहा है। इस इंस्टीट्यूट में इनोवेशन पर बड़े पैमाने पर काम किया जा रहा है जो मील का पत्थर साबित होगा।  उन्होंने कहा कि आज का स्टूडेंट्स थियरी से बहार निकले। अपने नजदीकी समस्याओं पर अध्ययन करे। इनोवेशन का मतलब है सामाजिक, औद्योगिक, वाणिज्यिक समस्याओं का समाधान हो। साथ ही इनोनवेशन सस्ता और आसान भी होना चाहिए। शोध पर ज्यादा जोर देने पर बल देते हुए उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो स्टूडेंट्स की तरक्की की रास्ता खोले।
इंद्रप्रस्थ इंस्टीट्यूट आफ इंफ्रार्मेशन टेक्नालाजी (आईआईटीडी),  नई दिल्ली के सीनियर  प्रोफेसर तमम टिल्लो और कालेज आफ इंजीनियरिंग पुणे के कुलपति मुकुल सुतावन ने भी तकनीकी विकास पर विस्तार से प्रकाश डाला। पिछला दशक तकनीक के विकास के मामले में हमारी ज़िंदगी में क्रांति लेकर आया है। इसने एक तरह से कई वैज्ञानिक आविष्कारों की नींव रख दी है। कई कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए काम कर रही हैं। एआई की मदद से हमारी ज़िंदगी में रोबोटिक्स का इस्तेमाल दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है। तकनीक ने मानव स्वास्थ्य में सुधार की दिशा में काफी योगदान किया है। पारंपरिक और आधुनिक प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारतीयों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। 
टेक यात्रा-2022 के अवसर पर अशोका इंस्टीट्यूट के स्टूडेंट्स ने अनूठे माडलों की प्रदर्शनी लगाई है। उद्घाटन सत्र के बाद कुलपतियों और शिक्षाविदों  ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया। साथ ही इंस्टीट्यूट के स्टूडेंट्स से रुबरु भी हुए। एकेटीयू के कुलपति ने निजी तौर पर स्टूडेंट्स के माडलों के बारे में विस्तार से जानकारी हासिल की और उनका हौसला भी बढ़ाया। इस अवसर पर अशोका इंस्टीट्यूट के चेयरमैन अंकित मौर्य भी मौजूदद ते।
अशोका इंस्टीट्यूट की निदेशक डा.सारिका श्रीवास्तव ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन एसोसिटेएट प्रोफेसर डा.वंदना दुबे, डा.प्रीति सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर पल्लवी सिंह, शर्मीला सिंह और अनुजा सिंह ने किया। इस अवसर पर अशोका इंस्टीट्यूट के फार्मेसी विभाग के प्रिंसिपल डा.बृजेश सिंह, अशोका स्कूल आफ बिजनेस के प्रिंसिपल सीपी मल्ल, डीन एसएस कुशवाहा, रजिस्ट्रार असीम देव, एसोसिएट प्रोफेसर राजेंद्र तिवारी, धर्मेंद्र दुबे, अर्जुन कुमार, राजीव मिश्रा, राजीव यादव, अभिषेक गुप्ता, डा.सौम्या श्रीवास्तव, ओपी शर्मा, कविता पटेल, प्रीति राय, शना फातिमा समेत बड़ी संख्या में शिक्षक एवं स्टूडेंट्स मौजूद थे। 

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