दीपोत्सव के पहले कुम्हार उद्योग को लगे पंख मिट्टी के दीपों को बनाने का सिलसिला शुरू



जौनपुर। दीपों के पर्व दीपावली की तैयारी हर तरफ तेज हो गई है। बाजार में गणेश-लक्ष्मी की प्रतिमाओं के साथ आर्टिफिशियल रंगोली, फूल-फत्ती के साथ ही रंग-पेंट की दुकानें सज गई हैं। वहीं दूसरी ओर गांव से लेकर शहर तक मिट्टी के दीया व खिलौने बनाने में जुटे कुम्हारों के चाक की रफ्तार भी तेज हो गई है। हर तरफ दीपोत्सव को लेकर उत्साह देखा जा रहा है।
दीपों का पर्व दीपावली नजदीक आते ही कुम्हारों के चाक की रफ्तार तेज हो गई है। रोशनी के इस त्योहार पर वह दीया, मिट्टी के खिलौने आदि बनाकर अच्छी कमाई करने में जुट गए हैं। इस काम में उनका पूरा परिवार लगा है। मिट्टी के दीये मेंं तेल व घी का दीपक जलाना पर्यावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। आधुनिकता की चकाचौंध में प्लास्टिक के बर्तनों के प्रचलन, बिजली के रंग-बिरंगे झालरों व मोमबत्तियों ने भले ही कब्जा कर लिया है, लेकिन आज भी मिट्टी के दीये व खिलौैने का स्थान बना है।
दीपावली में बच्चों की पसंद मिट्टी के बने गुल्लक और खिलौने होते हैं। कारीगर बच्चों को आकर्षित करने के लिए सामान्य गुल्लक के साथ ही डिजाइनर सिलिंडर, तो कोई मिकी माउस बना रहे हैं। जिसे देखते ही उनके कदम थम जाएंगे। बच्चों को आकर्षित करने के लिए कारीगर पूरी सिद्दत से आकर्षक कारीगरी में लगे हुए हैं। बाजार में गुड्डा-गुड़िया, दादा-दादी, गुल्लक, हाथी-घोड़े, पालकी, चुक्कू पकाना जैसे खिलौने बिकने आ गए हैं।
मिट्टी का दीपक 30 से 45 रुपये प्रति सैकड़ा।
डिजाइनर दीपक 75 से 120 रुपये प्रति सैकड़ा।
परई कच्ची मिट्टी का दीपक पांच से 10 रुपये प्रति पीस।
गुल्लक सिलिंडर 15 से 30 रुपये प्रति पीस।
साधारण गुल्लक 10 से 25 रुपये प्रति पीस।
जांता- पांच से 15 रुपये प्रति पीस।
हाथी, गाय व तोता 10 से 20 रुपये प्रति पीस।
जाति-धर्म के नाम पर नफरत फैलाने वालों के लिए जलालपुर की हिन्दू-मुस्लिम महिलाओं द्वारा बड़ा संदेश जा रहा है। जलालपुर पुरानी बाजार में महिलाएं मोम का दीया बना रही हैं। यह दीया बिना तेल के करीब 45 मिनट तक जलता रहेगा। आजीविका मिशन के तहत मिल्की स्वयं सहायता समूह की महिलाएं अध्यक्ष जफरुन एजाज के निर्देशन में निर्माण कर रही हैं। जफरुन ने बताया कि मिट्टी के दीपक को मोम और कहीं से नुकसान न पहुंचाने वाले कलर का उपयोग कर तैयार किया गया है। अभी तक पांच हजार से अधिक दीपक बनाया जा चुका है।
मोम का दीपक बनाने में स्वयं सहायता से जुड़ी पांच मुस्लिम और पांच हिंदू महिलाएं जुटी हुई हैं। यह हैं जफरुन एजाज, चांदतारा, रेहाना, नजबून, तरमीन और हिंदू महिलाओं में सुषमा देवी, सुभावती, इन्दुबाला, बिसाखा, जूही गुप्ता है।मिल्की स्वयं सहायता समूह की महिलाएं अध्यक्ष जफरुन एजाज के नेतृत्व में समूह की महिलाएं मंगलवार को विकास भवन पहुंची। दीपक को देख जिला कोआडिनेटर राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ओम प्रकाश यादव, जिला प्रबंधक शोभी गौड़ ने न सिर्फ तारीफ की बल्कि मौजूद अधिकारियों, कर्मचारियों ने दीपकों को खरीद लिया। जिला कोआडिनेटर ने विकास के पास स्टाल लगाने के लिए भी प्रेरित किया। यहां गुरुवार और शुक्रवार को समूह की महिलाएं स्टाल लगाएंगी वहीं शनिवार को वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में स्टाल लगाया जाएगा।

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