चंदौली से तीन बार सांसद रहे आनंद रत्न को हजारों नम आंखों ने दी अंतिम विदायी



चिरईगांव और गौरा बाजार बंद रहे, आसपास के स्कूल-कालेजों में श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद हुई छुट्टी

वाराणसी। चंदौली लोकसभा से लगातार तीन बार भाजपा के सांसद रहे आनंद रत्न मौर्य को हजारों नम आंखों ने अंतिम विदायी दी। वह काफी समय से किडनी की बीमारी से ग्रस्त थे और इन दिनों दिल्ली स्थित एक निजी अस्पताल में उनका डायलिसिस चल रहा था, इसी दौरान शुक्रवार की देर रात उन्होंने अपनी आखिरी सांस ली। शनिवार को बनारस के चिरईगांव स्थित उनके पैतृक आवास पर उनका पार्थिव शरीर लाया गया तो उनके परिवारीजन और बड़ी तादात में उन्हें अंतिम विदायी देने पहुंचे समर्थकों की आंखे भीग गईं। सरायमोहाना के तथागत घाट पर बौद्ध रीति के अनुसार श्री मौर्य का अंतिम संस्कार किया गया। उनके इकलौते पुत्र कुंदनरत्न मौर्य ने उन्हें मुखाग्नि दी। पूर्व सांसद आनंद रत्न मौर्य, पूर्व प्रधानमंत्री अटल विहारी वाजपेयी की सरकार में चंदौली के काफी चर्चित चेहरे थे।
गाजियाबाद स्थित एक निजी अस्पताल में शुक्रवार की देर रात निधन होने के बाद उन्हें एंबुलेंस से चिरईगांव लाया गया। उनका पार्थिव शरीर शाम करीब चार बजे पहुंचा तो उनके आवास पर हजारों की भीड़ जमा थी और सभी की आंखें नम थीं। अपने प्रिय नेता के निधन से चिरईगांव के अलावा गौरा बाजार बंद रहे। आसपास के स्कूलों में छुट्टी कर दी गई। पूर्व सांसद के आवास पर भिक्क्षु रेवत ने बौध रीति से अंतिम संस्कार की रस्म पूरी की। मौके पर मौजूद पूर्व सांसद की पत्नी आशा मौर्य, पुत्र कुंदन रत्न मौर्य, बेटी रोली मौर्य और बहू सौम्या मौर्य के आंखों से आंसू थमने का का नाम नहीं ले रहे थे। इनके भाई सुनील कांत, विनय रत्न मौर्य और संदीप सिंह, अजय मौर्य, विजय मौर्य, मलय कुमार काफी मर्माहत थे।  
बौद्ध रीति से पूजा-अर्चना के बाद फूलों से सजे एक वाहन पर उनका पार्थिव शरीर ऱखा गया तो उनके सम्मान में समर्थकों ने गगनभेदी नारे लगाए और उन्हें याद किया। बाद में श्री मौर्य के शव को सरायमोहाना स्थित उस तथागत घाट पर ले जाया गया, का निर्माण उन्होंने ही कराया था। इसी घाट पर उनका पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन हुआ।
चिरईगांव स्थित आनंद रत्न मौर्य के आवास पर अपने प्रिय नेता को श्रद्धा सुमन अर्पित करने के लिए पूर्व मेयर कौशलेंद्र सिंह, पूर्व एमएलसी डा.शिवनाथ यादव, पूर्व विधायक एवं मंत्री वीरेंद्र सिंह, उदयलाल मौर्य, छब्बू पटेल के अलावा आरपी कुशवाहा, सर्वेश कुशवाहा, शमशेर सिंह, मोती लाल शास्त्री, सुजीत मौर्य, शशि प्रताप मिश्र, हरिलाल यादव, सुजीत टीका, अशोक मौर्य, रोहित मौर्य, रघुनाथ चौधरी, प्रवीण कुशवाहा, नेमचंद मौर्य के अलावा चिरईगांव के पूर्व प्रधान धनंजय मौर्य, आशु मौर्य, संजीवन मौर्य, राकेश मौर्य, देवराज पटेल समेत बड़ी संख्या में लोगों ने पुष्पांजलि अर्पित की।
पूर्व सांसद आनद रत्न मौर्य के निधन पर यूपी से उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा है कि पूर्वांचल का एक सितारे का अंत हो गया। मौर्य जनप्रिय नेता थे और उन्होंने चंदौली के विकास में अहम भूमिका निभाई थी। इनके विकास कार्य आज भी वहां के गांवों में दिखते हैं और चंदौली संसदीय क्षेत्र के लोग उनके विकास कार्य और मृदुभाषी व्यवहार की तारीफ करते हैं।
आनंद रत्न मौर्य की गिनती इसलिए भी मृदुभाषी व विनम्र स्वभाव के नेताओं में होती थी, क्योंकि उन्होंने कभी किसी का दिल नहीं दुखाया। अपने विनम्र व्यवहार के चलते वह चंदौली संसदीय सीट से लगातार तीन बार (1991,96,98) चुनाव जीते औप एक कीर्तीमान बनाया था, जिसे आज तक कोई नहीं तोड़ पाया। चंदौली लोकसभा से वो कुल पांच बार सांसद का चुनाव लड़े। 1991 से 98 तक लगातार भाजपा से सांसद रहे, वहीं 1999 के लोकसभा चुनाव में लगातार चौथी बार भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े, लेकिन सपा के जवाहर लाल जायसवाल से हार गए। कुछ समय बाद उन्होंने भाजपा का साथ छोड़ दिया। पांचवी बार साल 2004 का लोकसभा चुनाव उन्होंने समाजवादी पार्टी के टिकट पर लड़ा, लेकिन बसपा के कैलाश नाथ सिंह यादव से चंद वोटों से चुनाव हार गए।
साल 2007 में आनंद रत्न मौर्य एक बार फिर भाजपा में शामिल हुए और पार्टी के उत्थान के लिए कई महत्त्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। इस दौरान उन्होंने 2015 से 2017 तक भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष के तौर पर भी कार्य किया था। इन दिनों वह सक्रिय राजनीति से अलग हो गए ।

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