कोविड से निपटने के लिए सकारात्मक ऊर्जा जरूरी:प्रो दीक्षित


व्यावहारिक मनोविज्ञान विभाग में तीन दिवसीय कार्यशाला शुरू

जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के व्यावहारिक मनोविज्ञान विभाग में तीन दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसका विषय "कोविड-19 का मानवीय सभ्यता और मानवता पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव "था । 
कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि केंद्रीय  हिंदी संस्थान आगरा के प्रोफ़ेसर उमापति दीक्षित केंद्रीय  ने कहा कि कोविड-19 भारतीय सभ्यता की मानवीय मूल्यों को प्रभावित किया है चारों ओर अवसाद का वातावरण है सकारात्मकता का अभाव है हमें मानसिक रूप से स्वस्थ होने की आवश्यकता है। मानवीय स्थापना की मूल्य ही हमें इस महामारी से मुक्त होने में सहायता करेगी। वातावरण में सकारात्मक सोच ही मानव मूल्यों को बढ़ावा देगी परिवार एवं मित्रों के साथ साथ हमारा संचार हमें सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।
कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए कुलपति प्रोफेसर निर्मला एस. मौर्य ने कहा कि जब भी कोई महामारी आती है तो वर्ग संघर्ष होता है और जो उस वर्ग संघर्ष में जीतता है वही जीवित रहता है। मनुष्य को प्रकृति का दोहन उतना ही करना चाहिए जितने से की प्रकृति की क्षति ना हो मानवता की साथ-साथ मनोविकार से ग्रस्त लोग भी समाज में है । कोविड-19 ने हमें कई पुराने नुस्खे एवं जीवनशैली में परिवर्तन करके स्वयं को स्वस्थ रखने एवं समायोजित करने के नए तरीके सिखाए हैं । 
कार्यक्रम में बतौर बीज वक्ता (मुख्य वक्ता) प्रोफेसर अवनीश कुमार बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झांसी ने कहा कोविड-19 ने हमारी जीवनशैली को विकसित किया है। इसमें हमारी शिक्षा पर्यटन स्वास्थ्य व्यवस्था व जीने के तरीके को बुरी तरह से प्रभावित किया है विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के द्वारा कोविड-19 से सफलतापूर्वक मुकाबला करने में मदद मिली है । इस महामारी से मुकाबला करने के लिए हमने स्वास्थ्य संबंधी अवस्थापना विकसित की है कोविड-19 का मुकाबला करने के लिए अभी तक कोई मानक तरीका या विधि विकसित नहीं हुई है। इससे समस्या की विक्रांता एवं परिस्थिति की अनुकूल इलाज के अलग-अलग प्रोटोकॉल विकसित करने की आवश्यकता है। 
 कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत प्रोफेसर अजय प्रताप सिंह जी ने किया संचालन डॉ जान्हवी श्रीवास्तव तथा आभार डॉ मनोज पांडेय ने व्यक्त किया कार्यक्रम में प्रो.मानस पांडेय ,प्रो ऋषभदेव, डॉ. मनोज मिश्र ,डॉ प्रमोद यादव, डॉ अनुराग मिश्र, डॉ पुनीत धवन , डॉक्टर अवधेश,डॉ अवध बिहारी, प्रो देवराज, डॉ वनिता आदि उपस्थित रहीं। निकी सहयोग शोध छात्र अवनीश विश्वकर्मा ने प्रदान किया।

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