चुनावी ड्यूटी से बचने के लिए क्या फर्जी वाड़ा जरूरी है ?



जौनपुर। पंचायत चुनाव में ड्यूटी कटवाने को लेकर जहां जरूरत मंद परेशान है वहीं समर्थवान  ड्यूटी न करने के लिये हर तरह के हथकंडे अपना रहे है। जो खासा चर्चा का बिषय बना है। यहां एक मुहावरा चरितार्थ हो रहा है समरथ के नहीं दोष गोसाईं, चाहे......... जी हां ऐसा ही एक मामला चुनाव में मतदान कार्मिक अधिकारी के कार्यालय में तैनात उनके स्टोनो का जो फर्जी वाड़े का संकेत करता है लेकिन ड्यूटी तो कट ही गयी। 
यहां बतादे कि जनपद के रामपुर कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में तैनात महिला कर्मचारी भावना रानी जो सीडीओ के स्टोनो की पुत्री है।सरकारी कर्मचारी होने के कारण चुनाव में ड्यूटी लगी थी ड्यूटी कटवाने के लिए कोरोना की जांच करायी गयी। इसमें खेल यह हुआ कि सदर अस्पताल से जो पर्चा बना उस पर पहले भावना रानी उम्र 10साल लिखा गया बाद में काट कर 32साल बनाया गया है।  एक अप्रैल को बने पर्चा पर 10अप्रैल को सैम्पल दिया जाता है। 
जांच रिपोर्ट 12 अप्रैल को आती है जिसमें कोरोना पाजिटिव बताया गया है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि जिस भावना रानी की रिपोर्ट भेजी गयी है वह भी 10 साल की हैं और जिस भावना रानी की ड्यूटी कटती है वह 32 साल अब सवाल यह खड़ा होता है या तो रिपोर्ट गलत है या फिर महिला गलत है यह तो जांच का बिषय है। 
भावना रानी कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में पूर्ण कालिक सर्विस पर तैनात हैं जब इनको कोरोना पाजिटिव हो गया है तो सभी कर्मचारियों की जांच क्यों नहीं करायी गयी और विद्यालय खुला कैसे है। ये सब बिन्दु पूरे मामले के जांच की ओर इशारा करते हैं क्या जिम्मेदार जांच करायेंगे अथवा वहीं मुहावरा चरितार्थ कर देगे कि समर्थवान का कोई दोष नहीं होता है। 

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