शहर के 11 चौराहो पर आटोमैटिक ट्रैफिक सिग्नल लगाने के लिए एजेन्सी का चयन नहीं जानिए कारण


जौनपुर। जिला प्रशासन की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक शहर की 11 तिराहों और चौराहों पर ऑटोमेटिक ट्रैफिक सिग्नल लगाना है। प्रशासन से अभी तक बजट आवंटन और एजेंसी का चयन नहीं हो सका है। पीपीपी मॉडल पर शहर के वाजिदपुर तिराहे पर ट्रैफिक सिग्नल छह महीने पहले लगा दिया गया, जो आज तक चालू नहीं हो सका।
डेढ़ वर्ष पहले अपर पुलिस अधीक्षक शहर की यातायात को सुगम बनाने के लिए ऑटोमेटिक सिग्नल सिस्टम और सीसी कैमरा लगाने के लिए प्रस्ताव भेजा था। इसको कमिश्नर वाराणसी के यहां स्वीकृत के लिए भेजा गया, जहां से स्वीकृत मिलने के बाद फर्म की तलाश शुरू हुई। इसकी अनुमानित लागत 4.70 करोड़ रुपये थी। पूर्व डीएम अनुज कुमार झा ने वाराणसी में ऑटोमेटिक सिग्नल लगाने वाली संस्था स्मार्ट सिटी को योजना के लिए फाइनल किया। इसके तहत शहर के 11 तिराहों और चौराहों का सर्वे भी किया था। तत्कालीन डीएम ने फर्म को पांच साल मरम्मत की शर्त भी रखी थी। जिस पर संस्था ने हाथ खड़ा कर दिए। एक बार फिर नए फर्म की तलाश शुरू हुई लेकिन वर्तमान जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड़ की ओर से दी गई शर्तों का पालन न करने पर एजेंसी का चयन नहीं हो पा रहा है। वहीं पूर्व में वाजिदपुर तिराहे पर पीपीपी मॉडल पर ऑटोमेटिक ट्रैफिक सिग्नल लगवाया गया। उसके बगल में बूथ भी बनवाया गया। बावजूद यह आज तक शुरू नहीं हो सका। इसके कारण आज भी लोग जाम से जूझ रहे हैं।
इन चौराहों पर लगना है ऑटोमेटिक ट्रैफिक सिग्नल
शहर के सिपाह तिराहा, वाजिदपुर तिराहा, नईगंज तिराहा, मुरादगंज तिराहा, चहारसू तिराहा, लाइन बाजार तिराहा, जेसीज चौराहा, पॉलिटेक्निक चौराहा, ओलंदगंज चौराहा, कोतवाली चौराहा, आंबेडकर चौराहा आदि जगहों पर ऑटोमेटिक सिग्नल लगाया जाना है।
सीओ सिटी देवेश सिंह की माने तो नई एजेंसी को शर्तों के हिसाब से सुविधाएं देने के लिए कहा गया है। अभी तक जिस एजेंसी से बातचीत हो रही थी वह पांच साल तक मरम्मत करने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में जल्द ही एजेंसी को मानक के हिसाब से तय किया जाएगा।

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