*जौनपुर के शंभूगंज बाजार में फर्जी अस्पताल का खेल! बिना डिग्री “डॉक्टर” बन मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़*
*जौनपुर* मिली जानकारी के अनुसार जिले के शंभूगंज बाजार में स्वास्थ्य व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल खड़ा करने वाला मामला सामने आया है, जहां अवैध रूप से एक अस्पताल धड़ल्ले से संचालित किया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि यहां इलाज करने वाला व्यक्ति खुद को *“डॉक्टर समरजीत सिद्धार्थ”* बताता है, जबकि उसके पास न तो किसी मान्यता प्राप्त डिग्री का प्रमाण है और न ही चिकित्सा क्षेत्र का कोई अनुभव।
*बिना बोर्ड, बिना पहचान—फिर भी चल रहा अस्पताल*
इस कथित अस्पताल की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि न तो बाहर कोई नाम-पट्ट (बोर्ड) लगा है और न ही इसे देखकर कोई अस्पताल होने का अंदाजा लगा सकता है। बावजूद इसके, अंदर हर तरह की चिकित्सकीय गतिविधियां खुलेआम की जा रही हैं।
*हर दूसरा व्यक्ति बना “डॉक्टर”*
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में झोलाछाप डॉक्टरों की भरमार है। कोई भी व्यक्ति बिना योग्यता के मरीजों का इलाज करने लग रहा है, जिससे लोगों की जान जोखिम में पड़ रही है।
*प्रशासन की चुप्पी पर सवाल*
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे मामले से अनजान कैसे हैं? क्या यह उनकी लापरवाही है या फिर मिलीभगत? आमतौर पर ऐसे मामलों में कार्रवाई तब होती है, जब किसी मरीज की जान चली जाती है—और फिर थोड़ी बहुत कार्रवाई कर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।
*“डॉक्टर” के साथ बना “पत्रकार” भी!*
सूत्रों के अनुसार, यह व्यक्ति खुद को पत्रकार भी बताता है और किसी मीडिया संस्थान का कार्ड दिखाकर अधिकारियों की आंखों में धूल झोंक रहा है। इस दोहरी पहचान के सहारे वह लंबे समय से इस अवैध धंधे को चला रहा है।
*बड़ा सवाल—कब जागेगा प्रशासन?*
आखिर कब तक ऐसे फर्जी डॉक्टर यूं ही लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ करते रहेंगे? क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है?
*मांग:*
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि इस पूरे मामले की तत्काल जांच कर दोषी के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी मासूम की जान न जाए।
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