*जौनपुर में PNG गैस पाइपलाइन खुदाई के दौरान धंसी मिट्टी में फंसे मजदूर, 30 फीट गहरे गड्ढे में हादसा, दो मजदूरों की मौत, एक की तलाश जारी*


जौनपुर --  नगर के केराकत क्षेत्र में पी एन जी गैस पाइपलाइन की खुदाई के दौरान हुए दर्दनाक हादसे में दो मजदूरों की मौत हो गई, जबकि एक मजदूर के मलबे में फंसे होने की आशंका है। घटना केराकत कोतवाली क्षेत्र के देवकली बाजार की है, जहां बुधवार देर रात गैस पाइपलाइन की मरम्मत का काम चल रहा था। इसी दौरान अचानक मिट्टी धंस गई और उसमें काम कर रहे मजदूर जिंदा ही दफन हो गए। हादसे के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोग बड़ी संख्या में मौके पर जमा हो गए। इस हादसे में जान गंवाने वाले मजदूरों की पहचान निरंजन कुमार महतो और प्रिंस कुमार के रूप में हुई है, जो बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के निवासी थे। दोनों अपने परिवार की आजीविका के लिए बाहर काम करने आए थे, लेकिन यह सफर उनके लिए अंतिम साबित हुआ। एसपी सिटी आयुष श्रीवास्तव के अनुसार, दोनों मजदूरों के शव को बाहर निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। वहीं तीसरे मजदूर की तलाश के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, गैस पाइपलाइन लगभग 30 फीट गहरे गड्ढे में स्थित है, जहां मरम्मत और वेल्डिंग का काम किया जा रहा था। इतनी गहराई में काम करना अपने आप में जोखिम भरा होता है, लेकिन इसके बावजूद सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए थे। बताया जा रहा है कि मजदूर बिना किसी सुरक्षा उपकरण के ही गड्ढे में उतरे थे। न तो उनके पास हेलमेट थे, न ही ऑक्सीजन या सुरक्षा बेल्ट जैसी जरूरी व्यवस्थाएं। ऐसे में मिट्टी धंसने की स्थिति में उनके पास बचने का कोई मौका नहीं बचा। इस हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या कार्यस्थल पर सुरक्षा नियमों का पालन किया जा रहा था? स्थानीय लोगों का आरोप है कि ठेकेदार और संबंधित एजेंसियों द्वारा सुरक्षा मानकों की खुलेआम अनदेखी की जा रही थी। एक स्थानीय दुकानदार ने बताया, “इतना गहरा गड्ढा था, लेकिन वहां कोई सुरक्षा इंतजाम नहीं दिखा। मजदूरों को बस काम पर लगा दिया गया था।” यह बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि लापरवाही ही इस हादसे की सबसे बड़ी वजह हो सकती है। इस घटना के बाद पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंच गई और तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। एनडीआरएफ और स्थानीय बचाव दल की मदद से मलबा हटाने का काम जारी है।

अधिकारियों का कहना है कि तीसरे मजदूर को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, गड्ढे की गहराई और मिट्टी की स्थिति के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
यह हादसा सिर्फ एक तकनीकी त्रुटि नहीं, बल्कि सिस्टम की कमजोरी को भी उजागर करता है। सवाल यह है कि इतनी बड़ी परियोजना में काम कर रहे मजदूरों की सुरक्षा के लिए क्या कोई ठोस व्यवस्था नहीं थी?

सरकारी नियमों के अनुसार, किसी भी निर्माण या खुदाई कार्य में सुरक्षा उपकरणों का होना अनिवार्य है। लेकिन जौनपुर की इस घटना में इन नियमों का पालन नहीं किया गया, जो बेहद गंभीर लापरवाही है। इस हादसे ने दो परिवारों की दुनिया उजाड़ दी है। जो मजदूर रोजी-रोटी के लिए अपने घर से दूर आए थे, वे अब कभी वापस नहीं लौटेंगे। उनके परिवारों के सामने अब आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।

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