राज्यसभा सांसद सीमा द्विवेदी के खिलाफ दर्ज मुकदमा वापस,सभी आरोपी दोषमुक्त
सुप्रीम कोर्ट के 2021 के आदेश पर हाई कोर्ट इलाहाबाद ने जनवरी 2026 में दी थी अनुमति
समाज के हित व राज्यहित में मुकदमा वापस लेने की सरकारी वकील ने दी थी अर्जी
2017 में सीमा द्विवेदी समेत 12 आरोपितों के खिलाफ दर्ज हुआ था आचार संहिता उल्लंघन का मुकदमा
बता दें कि वादी मुकदमा हेड कांस्टेबल दीपचंद राम ने थाना पंवारा में 7 मार्च 2017 को लिखित तहरीर दिया कि सूचना मिली है कि भाजपा प्रत्याशी सीमा द्विवेदी निवासी अचकारी, सुजानगंज को जीताने के संबंध में कुछ लोग चार वाहनों से प्रचार प्रसार कर रहे हैं।पुलिस भगौती चौराहा पहुंची वहां चार वाहन भाजपा प्रत्याशी सीमा द्विवेदी का प्रचार प्रसार करते पाए गए।सभी 11 व्यक्तियों से पूछताछ की गई सभी ने बताया कि सीमा द्विवेदी को जीताने के लिए प्रचार प्रसार कर रहे थे। सभी 11 व्यक्तियों को हिरासत में लिया गया। पुलिस विवेचना में सीमा द्विवेदी व 11 अन्य व्यक्तियों के खिलाफ आचार संहिता उल्लंघन की धाराओं में आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया। मामला गवाही में चल रहा था।चार गवाह परीक्षित हुए हैं।जिरह में प्रकाश में आया की सीमा द्विवेदी मौके पर मौजूद नहीं थीं। जिन लोगों को मौजूद होना बताया गया उनके पास से कोई चुनाव प्रचार सामग्री तथा पोस्टर, बैनर,माइक, झंडा आदि बरामद नहीं हुआ। घटना की फोटोग्राफी या वीडियोग्राफी भी नहीं कराई गई।इस बीच सुप्रीम कोर्ट के आदेश दिनांक 10 अगस्त 2021 के अनुपालन में हाई कोर्ट में पंजीकृत सुओ- मोटो रिट याचिका में पारित आदेश 22 जनवरी 2026 के द्वारा हाई कोर्ट इलाहाबाद की अनुमति मुकदमा वापस लेने के संबंध में प्राप्त हुई। आदेश के अनुक्रम में राज्यपाल महोदया द्वारा अभियोजन वापस लेने के संबंध में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करने की अनुमति दी गई। तब सरकारी वकील द्वारा कोर्ट में धारा 321 दंड प्रक्रिया संहिता के तहत मुकदमा वापस लेने का प्रार्थना पत्र दिया गया कि इस मामले से समाज के हित पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है इसलिए राज्यहित में मुकदमा वापस लिया जाना आवश्यक है। कोर्ट ने आदेश में लिखा कि आरोपी के विरुद्ध आरोप पत्र प्रस्तुत किया गया है। अभियोजन अधिकारी द्वारा वाद वापस लेने का प्रार्थना पत्र दिया गया है जिससे स्पष्ट है कि अभियोजन की सफलता संभव नहीं है और शासन अनुपालन में किया गया है। जनहित व न्यायहित एवं उत्तर प्रदेश शासन के पत्रांक 27 फरवरी 2026 के आलोक में मुकदमा वापस लिए जाने का प्रार्थना पत्र स्वीकार किए जाने योग्य है। कोर्ट ने प्रार्थना पत्र स्वीकार करते हुए सभी आरोपितों को आचार संहिता उल्लंघन के आरोप से दोष मुक्त कर दिया।
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