जौनपुर में सड़क दुर्घटना मामलों पर सख्ती: आदेश न मानने पर तहसीलदारों का वेतन रोका।



जौनपुर। सड़क दुर्घटना से जुड़े मामलों में अदालती आदेशों की अनदेखी करना प्रशासनिक अधिकारियों को भारी पड़ रहा है। जिलाधिकारी (DM) ने कड़ा रुख अपनाते हुए तहसीलदार सदर का वेतन अग्रिम आदेश तक रोक दिया है। वहीं, दो अन्य मामलों में तहसीलदार बदलापुर का वेतन भी स्थगित कर दिया गया है।
यह कार्रवाई ट्रिब्यूनल जज मनोज कुमार अग्रवाल द्वारा दो दिन पूर्व जिलाधिकारी का वेतन रोकने के आदेश के बाद सामने आई है। हालांकि, जिलाधिकारी द्वारा स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने और तहसीलदारों के आश्वासन के बाद 22 अप्रैल को उनका वेतन बहाल कर दिया गया था।
वेतन बहाली के बाद जिलाधिकारी ने अपने अधीनस्थ अधिकारियों के साथ बैठक कर लंबित मामलों की समीक्षा की। इस दौरान सड़क दुर्घटना के छह मामलों में कोर्ट के आदेशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए तहसीलदार सदर का वेतन रोकने का निर्णय लिया गया।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के निर्देशों के तहत सड़क दुर्घटना मामलों में, जहां वाहन स्वामियों के खिलाफ रिकवरी सर्टिफिकेट (RC) जारी हो चुके हैं, वहां शीघ्र वसूली और निस्तारण अनिवार्य है। इसके बावजूद जनपद में कई मामले ऐसे हैं जो 50 वर्षों से अधिक समय से लंबित हैं और अब तक वसूली नहीं हो सकी है।
पूर्व में भी ट्रिब्यूनल जज द्वारा एसडीएम और तहसीलदारों का वेतन रोके जाने के बाद बड़ी संख्या में मामलों का निस्तारण हुआ था, जिससे पीड़ित परिवारों को मुआवजा मिल सका। लेकिन लगातार लापरवाही के चलते कोर्ट को सख्त कदम उठाते हुए जिलाधिकारी तक का वेतन रोकने का आदेश देना पड़ा।
अब प्रशासन वसूली संबंधी मामलों में सख्ती बरतते हुए तेजी से कार्रवाई कर रहा है, ताकि वर्षों से लंबित मामलों का जल्द निपटारा हो सके और पीड़ितों को न्याय मिल सके।

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