रन्नो का ऐतिहासिक बशारती जुलूसे अमारी में अंजुमनों ने किया नौहा मातम
नौपेड़वा, जौनपुर। बक्शा विकास खण्ड के सदरुद्दीनपुर रन्नो गांव में रविवार को अहले हरम मदीने की याद में बशारती जुलूसे अमारी का आयोजन हुआ। ऐतिहासिक अमारी में अंजुमन सिपाहे हुसैनी भनौली सादात, अंजुमन मुनच्चे मजलूमिया फैजाबाद, अंजुमन गुनच्चे नासिरुल अजा बड़ागांव शाहगंज, अंजुमन जिन्तुल अजा अलीगढ़ अमहट सुल्तानपुर, अंजुमन सज्जादिया पठानी टोला बनारस, अंजुमन हुसैनिया बलुआ घाट एवं अंजुमन सज्जादिया रजिस्टर्ड मुफ्ती मोहल्ला जौनपुर से आयी अंजुमनों ने शिरकत किया।आयोजित मजलिस में मौजूद लोगों ने नौहखानी व सीनाजनी किया। कार्यक्रम की शुरुआत नासिरिया अरबी स्कूल के प्रिंसिपल मौलाना महफूजुल हसन खां ने मजलिस पढ़ी। तत्पश्चात अलम दुलदुल व अमारी निकाली गयी। मौलानाओं ने हजरत इमाम की शहादत को बयां की तो मजलिस में मौजूद लोग फफककर रो पड़े। दूर—दराज से आये मौलानाओं ने 72 साथियों के अलावा शकीना पर हुए जुल्म की दास्तान सुनाए तो मौजूद सैकड़ों महिलाओं, पुरुषों आदि की आंखें नम हो गयीं। जुलूस सुबह 8 बजे रवाना हुआ जो भ्रमण करते हुए शाम 7 बजे गांव स्थित रौजा ए रसूल पर ठंडा किया गया। दस मोहर्रम सन 61 हिजरी को इमाम हुसैन ने अपने 72 साथियों के साथ शहादत व उनके परिवार के सदस्यों को यजीद द्वारा शाम को कैदखाने में कैद कर दिया था। जब कैद से रिहाई मिली तो परिवार के लोगों ने कर्बला जाकर शहीदों के लाशों को दफन कर अपने मदीने लौटे।
उसी याद में अहले हरम की मदीने वापसी के कहर जुलूस ए अमारी का आयोजन हुआ। जुलूस के दौरान 18 अलम तथा शकीना का ताबूत बरामद किया गया। कर्बला में छः माह के अबोध बच्चे को पानी न पिलाना व शकीना के साथ हुए जुल्म की दास्तां सुनकर लोगों की आंखें नम हो गयीं। जुलूस का संचालन मौलाना शाने आलम रन्नवी एवं आभार शेख साहेबे आलम ने जताया। इस अवसर पर बदर अहमद, मौलाना शाने आलम, जकी अहमद, खादिम अब्बास, शकील अब्बास, बाबर अली, जाने आलम रन्नवी, रजा हुसैन, शेर अली, अली हैदर खां, इरफान, माहताब हुसैन सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे। सुरक्षा की दृष्टि से बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी सहित थानाध्यक्ष विक्रम लक्ष्मण सिंह भी मौजूद रहे।
उसी याद में अहले हरम की मदीने वापसी के कहर जुलूस ए अमारी का आयोजन हुआ। जुलूस के दौरान 18 अलम तथा शकीना का ताबूत बरामद किया गया। कर्बला में छः माह के अबोध बच्चे को पानी न पिलाना व शकीना के साथ हुए जुल्म की दास्तां सुनकर लोगों की आंखें नम हो गयीं। जुलूस का संचालन मौलाना शाने आलम रन्नवी एवं आभार शेख साहेबे आलम ने जताया। इस अवसर पर बदर अहमद, मौलाना शाने आलम, जकी अहमद, खादिम अब्बास, शकील अब्बास, बाबर अली, जाने आलम रन्नवी, रजा हुसैन, शेर अली, अली हैदर खां, इरफान, माहताब हुसैन सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे। सुरक्षा की दृष्टि से बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी सहित थानाध्यक्ष विक्रम लक्ष्मण सिंह भी मौजूद रहे।
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