वैज्ञानिक सोच से आत्मनिर्भर भारत का निर्माण: प्रो. वंदना सिंह
विकसित भारत के लिए शोध, नवाचार जरूरी : प्रो. बाल चन्द्र यादव
दो दिवसीय राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का भव्य समापन
जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर के प्रो. राजेन्द्र सिंह (रज्जू भैया) संस्थान में शनिवार को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर आर्यभट्ट सभागार में गरिमामय एवं प्रेरणादायी कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो. वंदना सिंह ने विज्ञान को समाज के सर्वांगीण विकास की आधारशिला बताते हुए विद्यार्थियों को नवाचार, शोध एवं सृजनात्मक चिंतन की दिशा में अग्रसर होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण ही राष्ट्र को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाती है तथा नई पीढ़ी को समस्याओं के समाधान हेतु तार्किक एवं प्रयोगात्मक सोच विकसित करनी चाहिए। भारत तेजी से उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए हमें अपने युवा पीढ़ी को सशक्त करना पड़ेगा | इस दिशा में भारत सरकार के स्टार्टअप, इनक्यूबेटर, शोध और अनुसंधान में प्रोत्साहन दिया जा रहा है |
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय लखनऊ के प्रो. बाल चन्द्र यादव ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हो रहे नवीन वैज्ञानिक अनुसंधानों के साथ नैनोसाइंस एवं इसकी उपयोगिता तथा वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भारत की भूमिका पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान युग ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था का है, जिसमें वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार की निर्णायक भूमिका है। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्रो. मृत्युञ्जय पाण्डेय ने वैज्ञानिक सोच, गुणवत्तापूर्ण शोध, अंतर्विषयी अध्ययन तथा युवाओं की जिम्मेदारी पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने विद्यार्थियों को शोध में मौलिकता, नैतिकता और समर्पण बनाए रखने की प्रेरणा दी।
रज्जू भैया संस्थान के निदेशक एवं अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. प्रमोद कुमार यादव ने स्वागत भाषण देते हुए राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। संकायाध्यक्ष प्रो. राजेश शर्मा ने विज्ञान में महिलाओं के उपलब्धियों को विस्तार से बताया।
इस अवसर पर आयोजित क्विज, निबंध लेखन, पोस्टर एवं रंगोली प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया। साथ ही सभी प्रतिभागियों को सहभागिता प्रमाणपत्र वितरित किए गए। प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों की रचनात्मकता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और विषय के प्रति गहन समझ स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुई।
कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन प्रो. देवराज सिंह द्वारा प्रस्तुत किया गया, जबकि संचालन डॉ. शशिकांत यादव ने कुशलतापूर्वक किया।
इस अवसर पर प्रो मनोज मिश्र, प्रो प्रदीप कुमार, प्रो. मिथिलेश सिंह, प्रो. गिरिधर मिश्र, प्रो. प्रमोद कुमार, डा दिग्विजय सिंह राठौर, डॉ. नीरज अवस्थी, डॉ. अजीत सिंह, डॉ. सुजीत चौरसिया, डॉ. धीरेन्द्र चौधरी, डॉ. पुनीत धवन, डॉ. मिथिलेश यादव, डॉ. काजल डे, डॉ. आलोक वर्मा, डॉ. दिनेश वर्मा, डॉ. संदीप वर्मा, डॉ. रामांशु, डॉ. आशीष वर्मा, डॉ. दीपक मौर्य, डॉ. सौरभ सिंह, डॉ.अवधेश कुमार मौर्य सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के शिक्षकगण, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। पूरे आयोजन के दौरान विज्ञान के प्रति उत्साह, जिज्ञासा एवं नवाचार की भावना का सजीव और प्रेरणादायी वातावरण बना रहा।
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