सोशल मीडिया के दौर में मानसिक शांति और आत्मिक संतुलन ही सच्ची खुशी: प्रो. पाथर्डीकर

युवाओं में खुशी का स्तर कम होना चिंताजनक: प्रो. अजय प्रताप

विश्वविद्यालय में विश्व प्रसन्नता दिवस पर हुआ  प्रेरक आयोजन

जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के वेलनेस सेंटर द्वारा शुक्रवार को ‘विश्व प्रसन्नता दिवस’ के अवसर पर संकाय भवन स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल में एक प्रेरणादायी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस वर्ष की थीम “सोशल मीडिया और वेल-बीइंग (सुख-समृद्धि)” रही, जिसमें डिजिटल जीवन और मानसिक स्वास्थ्य के बीच संतुलन पर विशेषज्ञों ने विस्तार से विचार व्यक्त किए।

मुख्य वक्ता प्रबंध अध्ययन संकायाध्यक्ष प्रो. अविनाश पाथर्डीकर ने कहा कि “सुख कोई मंज़िल नहीं, बल्कि एक निरंतर यात्रा है।” उन्होंने बताया कि सच्चा सुख भौतिक वस्तुओं की अंधी दौड़ में नहींबल्कि धर्मानुकूल आचरणत्याग और संयम में निहित है। उन्होंने कहा कि धन हमें सुविधाएं तो दे सकता हैलेकिन मानसिक शांति और संतोष की गारंटी नहीं दे सकता। सोशल मीडिया के इस दौर में वास्तविक आनंद आत्मिक संतुलन और सादगी में ही निहित है।

वेलनेस सेंटर के समन्वयक प्रो. अजय प्रताप सिंह ने ‘हैप्पीनेस इंडेक्स 2026’ के संदर्भ में कहा कि 25 वर्ष से कम आयु के युवाओं में खुशी का स्तर कम होना गंभीर चिंता का विषय है। इसके पीछे सोशल मीडिया पर बढ़ती निर्भरता और वर्चुअल दुनिया में खुशी तलाशने की प्रवृत्ति प्रमुख कारण है। उन्होंने युवाओं से आत्मनिर्भर होकर अपनी खुशी स्वयं निर्मित करने का आह्वान किया।जनसंचार विभाग के डॉ. सुनील कुमार ने कहा कि जीवन में प्रसन्न रहने के लिए दिखावे की आवश्यकता नहीं हैबल्कि छोटी-छोटी बातों में खुशियाँ खोजने की आदत विकसित करनी चाहिए।

विषय प्रवर्तन करते हुए नोडल अधिकारी डॉ. अन्नू त्यागी ने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग मानसिक संतुलन को प्रभावित कर सकता हैइसलिए संतुलित उपयोग आवश्यक है। साथ हीजीवन में प्राप्त प्रत्येक उपलब्धि के प्रति कृतज्ञता का भाव ही सकारात्मकता का आधार बनता है। डॉ. अवधेश मौर्य ने ख़ुशी पर एक कविता सुनायी। कार्यक्रम का संचालन जनसंचार विभाग के डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर ने किया। इस अवसर पर डॉ. मनोज पांडेडॉ. जाह्नवी श्रीवास्तवडॉ. अमित मिश्र, अजय मौर्य, अभिषेक सिंह सहित अनेक शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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