शोध एवं नवाचार प्रोत्साहन नीति का लाभ उठाएं शिक्षक- प्रो. वंदना सिंह
पूर्वांचल विश्वविद्यालय में शोध एवं नवाचार को बढ़ावा देने हेतु नई प्रोत्साहन नीति लागू
गणतंत्र दिवस के अवसर पुरस्कृत होंगे शिक्षक
उत्कृष्ट शोध पर मिलेगा “शोध उत्कृष्टता पुरस्कार”
उच्च प्रभाव वाले शोध प्रकाशनों पर 30 हजार रुपये तक का प्रोत्साहन
शोध परियोजनाओं पर शिक्षकों को मिलेगा विशेष पुरस्कार
जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर ने शिक्षकों में शोध, नवाचार एवं अकादमिक उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से शोध प्रोत्साहन एवं उत्कृष्टता पुरस्कार नीति–2025 को लागू कर दिया है। सोमवार को कुलपति प्रो. वंदना सिंह ने कहा कि इस नीति का शिक्षक अधिक से अधिक लाभ उठाएं। उन्होंने कहा यह प्रोत्साहन नीति शिक्षकों को शोध और नवाचार के लिए प्रेरित करेगी ।यह नीति विश्वविद्यालय के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) द्वारा तैयार की गई है।
कुलपति प्रो. वंदना सिंह ने कहा कि इसका उद्देश्य उच्च गुणवत्ता वाले शोध कार्यों, अंतरराष्ट्रीय स्तर की शोध पत्रिकाओं में प्रकाशन, पेटेंट प्राप्ति तथा बाह्य वित्त पोषित शोध परियोजनाओं को बढ़ावा देना है।
उन्होंने कहा कि इस नीति के अंतर्गत विश्वविद्यालय के नियमित एवं संविदा शिक्षकों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों, सम्मेलनों, कार्यशालाओं में शोध पत्र प्रस्तुत करने हेतु वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। प्रति शिक्षक अधिकतम 5,000 रुपये तक की सहायता दी जाएगी, जिसमें पंजीकरण शुल्क तथा द्वितीय श्रेणी वातानुकूलित रेल यात्रा किराया सम्मिलित होगा।
आइक्यूएसी सेल के कोऑर्डिनेटर प्रोफेसर गिरिधर मिश्र ने कहा कि उच्च प्रभाव वाले शोध प्रकाशनों को प्रोत्साहित करने के लिए विश्वविद्यालय ने प्रभाव कारक (इम्पैक्ट फैक्टर) के आधार पर आर्थिक प्रोत्साहन की व्यवस्था किया है। एससीआई एवं स्कोपस जैसी प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित शोध पत्रों पर 5,000 रुपये से लेकर 30,000 रुपये तक का प्रोत्साहन प्रदान किया जाएगा। वहीं, एक वर्ष में कुल इम्पैक्ट फैक्टर 20 या उससे अधिक होने पर संबंधित शिक्षक को “शोध उत्कृष्टता पुरस्कार” से सम्मानित किया जाएगा, जिसे विश्वविद्यालय की कुलपति द्वारा प्रदान किया जाएगा।
पेटेंट को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रकाशित एवं स्वीकृत पेटेंट पर भी 5,000–5,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान किया गया है। इसके अतिरिक्त शोध परियोजनाओं पर अनुदान राशि के आधार पर 10,000 रुपये से 25,000 रुपये तक का विशेष पुरस्कार भी निर्धारित किया गया है।
विश्वविद्यालय में कार्यरत शिक्षकों से इस नीति के अंतर्गत पुरस्कार हेतु आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। यह गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर प्रदान किए जाएंगे। इच्छुक शिक्षक निर्धारित प्रारूप में सभी आवश्यक अभिलेखों सहित अपना आवेदन पत्र 16 जनवरी 2026 तक आंतरिक गुणवत्ता सुनिश्चित प्रकोष्ठ कार्यालय में प्रस्तुत कर सकते हैं।
बैठक में कुलसचिव केशलाल, परीक्षा नियंत्रक डॉ विनोद कुमार सिंह, प्रो.देवराज, प्रो. गिरिधर मिश्र,डॉ धीरेन्द्र चौधरी उपस्थित रहे।
गणतंत्र दिवस के अवसर पुरस्कृत होंगे शिक्षक
उत्कृष्ट शोध पर मिलेगा “शोध उत्कृष्टता पुरस्कार”
उच्च प्रभाव वाले शोध प्रकाशनों पर 30 हजार रुपये तक का प्रोत्साहन
शोध परियोजनाओं पर शिक्षकों को मिलेगा विशेष पुरस्कार
जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर ने शिक्षकों में शोध, नवाचार एवं अकादमिक उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से शोध प्रोत्साहन एवं उत्कृष्टता पुरस्कार नीति–2025 को लागू कर दिया है। सोमवार को कुलपति प्रो. वंदना सिंह ने कहा कि इस नीति का शिक्षक अधिक से अधिक लाभ उठाएं। उन्होंने कहा यह प्रोत्साहन नीति शिक्षकों को शोध और नवाचार के लिए प्रेरित करेगी ।यह नीति विश्वविद्यालय के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) द्वारा तैयार की गई है।
कुलपति प्रो. वंदना सिंह ने कहा कि इसका उद्देश्य उच्च गुणवत्ता वाले शोध कार्यों, अंतरराष्ट्रीय स्तर की शोध पत्रिकाओं में प्रकाशन, पेटेंट प्राप्ति तथा बाह्य वित्त पोषित शोध परियोजनाओं को बढ़ावा देना है।
उन्होंने कहा कि इस नीति के अंतर्गत विश्वविद्यालय के नियमित एवं संविदा शिक्षकों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों, सम्मेलनों, कार्यशालाओं में शोध पत्र प्रस्तुत करने हेतु वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। प्रति शिक्षक अधिकतम 5,000 रुपये तक की सहायता दी जाएगी, जिसमें पंजीकरण शुल्क तथा द्वितीय श्रेणी वातानुकूलित रेल यात्रा किराया सम्मिलित होगा।
आइक्यूएसी सेल के कोऑर्डिनेटर प्रोफेसर गिरिधर मिश्र ने कहा कि उच्च प्रभाव वाले शोध प्रकाशनों को प्रोत्साहित करने के लिए विश्वविद्यालय ने प्रभाव कारक (इम्पैक्ट फैक्टर) के आधार पर आर्थिक प्रोत्साहन की व्यवस्था किया है। एससीआई एवं स्कोपस जैसी प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित शोध पत्रों पर 5,000 रुपये से लेकर 30,000 रुपये तक का प्रोत्साहन प्रदान किया जाएगा। वहीं, एक वर्ष में कुल इम्पैक्ट फैक्टर 20 या उससे अधिक होने पर संबंधित शिक्षक को “शोध उत्कृष्टता पुरस्कार” से सम्मानित किया जाएगा, जिसे विश्वविद्यालय की कुलपति द्वारा प्रदान किया जाएगा।
पेटेंट को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रकाशित एवं स्वीकृत पेटेंट पर भी 5,000–5,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान किया गया है। इसके अतिरिक्त शोध परियोजनाओं पर अनुदान राशि के आधार पर 10,000 रुपये से 25,000 रुपये तक का विशेष पुरस्कार भी निर्धारित किया गया है।
विश्वविद्यालय में कार्यरत शिक्षकों से इस नीति के अंतर्गत पुरस्कार हेतु आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। यह गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर प्रदान किए जाएंगे। इच्छुक शिक्षक निर्धारित प्रारूप में सभी आवश्यक अभिलेखों सहित अपना आवेदन पत्र 16 जनवरी 2026 तक आंतरिक गुणवत्ता सुनिश्चित प्रकोष्ठ कार्यालय में प्रस्तुत कर सकते हैं।
बैठक में कुलसचिव केशलाल, परीक्षा नियंत्रक डॉ विनोद कुमार सिंह, प्रो.देवराज, प्रो. गिरिधर मिश्र,डॉ धीरेन्द्र चौधरी उपस्थित रहे।
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